अगर आप बहुत बड़े सिनेमा प्रेमी नहीं भी होंगे तब भी एक नाम पिछले कुछ सालों से आपको बार-बार सुनाई पड़ रहा होगा, और वो नाम है 'पंकज त्रिपाठी'. पंकज त्रिपाठी वही शख़्स हैं जिन्हें आपने गैंग्स ऑफ़ वासेपुर के सुल्तान के रूप में देखा, फिर मसान, फ़ुकरे, बरेली की बर्फ़ी, न्यूटन और अभी हाल ही आई स्त्री इनके बिना अधूरी लगती है.

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अभी कुछ दिनों पहले पंकज ने फ़िल्म समिक्षक अनुपमा चोपड़ा को एक इंटरव्यू दिया. इस इंटरव्यू में जो चीज़ साफ़-साफ़ दिखती है, वो है पंकज की सादगी और सरलता.

पंकज की परवरिश बिहार के गोपालगंज ज़िले में हुई है. उनकी शालीनता का एक कारण उनका छोटे जगह से होना भी होगा. एक अन्य इंटरव्यू में वो कहते भी हैं कि छोटे शहर के लोगों के ऊपर 'कल्चर्ल बैगेज' बहुत होता है, इसलिए भी वो सबसे झुक कर मिलते हैं.

शायद आपको मालूम न हो, ऊपर बताई गई फ़िल्मों के अलावा भी आपने पंकज त्रिपाठी को देखा होगा. अगर आपको अभिषेक बच्चन की रन फ़िल्म याद हो, तो उसमें विजय राज़ (कौआ बिरयानी खाने वाले) को नाले में कुदवाने वाले शख़्स पंकज त्रिपाठी ही थे.

इस इंटरव्यू में पंकज बताते हैं कि यहां आने से पहले वो अपनी पत्नि के लिए खाना बना कर आ रहे हैं, आपको बता दें कि फ़िल्मों में काम करने से पहले पंकज पटना के एक बड़े होटल में काम भी कर चुके हैं.

उनकी हालिया फ़िल्म स्त्री ने सौ करोड़ कमाई वाले क्लब में जगह बना ली है और वो इस साल की सबसे ज़्यादा मुनाफ़ा देने वाली फ़िल्मों में से है. क्योंकि उसकी लागत बहुत कम रही थी.

पंकज़ त्रिपाठी की ख़ासियत ये है कि वो छोटे किरदारों को भी उतनी ही इमानदारी से निभाते हैं, जैसे वो लीड रोल हो. इसलिए वो हर सीन में दर्शकों की आंखों पर चढ़ते हैं.

किरदार को निभाने का उनका अपना तरीका है, पंकज कहते हैं कि किरदार को समझने से पहले उसके माहौल को समझना, उस वक़्त की राजनीति, समाज को समझना ज़रूरी है. अनुपमा चोपड़ा को ही दिए एक इंटरव्यू में नवाज़ुद्दीन सिद्दिकी भी ये बात कह चुके हैं.

पंकज को इंप्रोवाइज़ करने के लिए भी जाना जाता है. स्त्री फ़िल्म में 'चुड़ैल का आधार सब से लिंक है' डायलॉग पंकज की दिमाग़ की उपज है.

पंकज का पूरा इंटरव्यू आप यहां देख सकते हैं.