दुनिया में ऐसे लोगों की कमी नहीं है, जो अपनी असफ़लता का ठीकरा हालातों और किस्मत के माथे फोड़ते रहते हैं. लेकिन हकीक़त तो ये है कि अगर दिल में जज़्बा हो, तो कोई भी मुसीबत इंसान की सफ़लता की राह में रोड़ा नहीं बन सकती. ये साबित कर दिखाया है 21 साल की एक लड़की ने, जो अपनी आंखों की 80 फ़ीसदी रौशनी खो चुकी है.

प्राची देख नहीं सकती, पर उसने अपनी निगाहें हमेशा अपनी मंज़िल पर जमा कर रखीं. 21 वर्षीय प्राची सुखवानी ने सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक CAT (कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट) क्रैक कर लिया है. प्राची को IIM अहमदाबाद में एडमिशन मिला है.

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प्राची महाराजा सायाजीराव यूनिवर्सिटी से BBA की छात्रा हैं. उन्हें मैकुलर डिस्ट्रॉफ़ी नाम की बीमारी है, जिसमें आंखों की रौशनी जाने लगती है. प्राची जब तीसरी कक्षा में थीं, तभी उनकी आंखों की 80 फ़ीसदी रौशनी जा चुकी थी. ये एक जेनेटिक बीमारी है, जिसका कोई इलाज नहीं है.

प्राची का कहना है कि IIM से मैनेजमेंट की डिग्री लेने के बाद वह किसी कंपनी में काम करना चाहेंगी. कुछ दिनों का अनुभव लेने के बाद, वह अपनी ख़ुद की कंपनी खोलना चाहती हैं.

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प्राची के पिता कपड़ों का कारोबार करते हैं. पिछले 15 साल से वो प्राची को लेकर डॉक्टरों के चक्कर लगा रहे थे, लेकिन कुछ ख़ास मदद नहीं हो सकी. डॉक्टरों ने प्राची को सलाह दी थी कि वह पढ़ने के लिए विशेष तरह के लेंस का प्रयोग करें. लेकिन यह विशेष लेंस भी प्राची की समस्या कम नहीं कर पा रहे थे. इसके बावजूद, प्राची ने CAT की परीक्षा में 98.55 प्रतिशत नंबर हासिल किए हैं.

प्राची एक NGO बनाकर दृष्टि बाधित लोगों की मदद भी करना चाहती हैं. हम इस सफ़लता के लिए उन्हें बधाई देते हैं.

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