हर शहर में गाड़ी से चलने वालों के लिए कई नियम और कानून बनाए गए हैं, लेकिन पैदल चलने वालों के लिए नहीं. अकसर देखा जाता है कि गाड़ी में रौब से घूमने वाले लोग पैदल चलने वालों को कुछ समझते ही नहीं है. रोड पर जहां मन चाहा वहीं गाड़ी लगा दी और इसका ख़ामियाज़ा सिर्फ़ और सिर्फ़ आम जनता को भुगतना पड़ता है.

भारतीय सड़कों पर चलते वक़्त ज़्यादातर लोग अपने आप को असहज महसूस करते हैं. 2008 में Central Road Research Institute द्वारा कराए गए सर्वे के अनुसार, पैदल चलने वाले 10 में से 9 लोग रोड क्रॉस करते वक़्त ख़ुद को सुरक्षित महसूस नहीं करते. इतना ही नहीं, आपको ये जानकर हैरानी होगी कि भारत में हर रोज़ करीब 400 ट्रैफ़िक दुर्घटनाएं होती हैं, जिसमें पैदल चलने वाले 20 लोग अपनी जान गंवा देते हैं.

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सड़क का इस्तेमाल करने वाले हर शख़्स को सुरक्षित रहने का अधिकार है. पैदल सफ़र कर रहे यात्रियों के अधिकारों का मुद्दा काफ़ी पुराना है.

इस याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा, 'सभी व्यक्तियों को सड़क पर चलने का अधिकार है. वाहन से सफ़र करने वाले लोगों को अधिक देखभाल की आवश्यकता है. इसलिए ये कहना अनुचित होगा कि सड़क पर चल रहे लोग किसी भी दुर्घटना के लिए ख़ुद जिम्मेदार हैं.'

क्यों होती हैं दुर्घटनाएं ?

1. Pedestrians के लिए कोई नियम न होने की वजह से वो किसी भी वक़्त रोड क्रॉस करने लगते हैं, जिससे दुर्घटना घटने की संभावना बढ़ जाती है.

2. गाड़ियों के Over Speed होने के कारण भी कई हादसे होते हैं.

3. कई लोग फ़ोन पर बात करते-करते सड़क पार करने लग जाते हैं, ज़्यादातर दुर्घटनाएं इस कारण भी होती हैं.

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4. कभी-कभी लोगों को जाम से निकलने की इतनी ज़्यादा जल्दी होती है कि वो सड़क पर सो रहे लोगों को अनदेखा कर देते हैं.

5. ज़ेबरा क्रासिंग और सिग्नल न मिलने के बाद भी पैदल यात्री सड़क पार करने लगते हैं.

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'The International Federation of Pedestrians' सार्वजनिक स्थान पर चलने के लिए वकालत कर रहे हैं. वहीं लापरवाही से वाहन चलाकर दूसरे की जान को ख़तरे में डालने की इज़ाजत किसी को नहीं होनी चाहिए. अफ़सोस की बात है कि हमारे देश में पैदल चलने वाले लोगों को नियंत्रित करने के लिए कोई उपयुक्त कानून नहीं है. पैदल चलने वाली यात्री अपनी जान जोख़िम में डालकर सड़क पार करने की हिम्मत जुटा पाते है.

इस साल की शुरुआत में यातायात सलाहकार द्वारा दायर की गई याचिका पर पंजाब हाईकोर्ट द्वारा पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और भारत सरकार को ‘Right To Walk’ लागू करने के लिए नोटिस जारी किया गया है.

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