एक इंसान को उसके फ़ायदे और नुकसान के बारे में अच्छी तरह पता होता है, लेकिन अपनी आदत से मजबूर लोग समझ कर भी समझना नहीं चाहते. अब जैसे कि वैज्ञानिक हमें कितनी बार नदी या समुद्र किनारे कचरा न फ़ेंकने की चेतावनी दे चुके हैं. इसके बावजूद लोग अपनी हरकतों से बाज़ न आते हुए, खुलेआम सड़कों, तालाबों, नहरों, नदियों और समुद्रों में कूड़ा फेंक देते हैं.

इसी लापरवाही का नतीजा है कि समुद्र में इकट्ठा हो रहा कचरा दुनियाभर के लिए एक बेहद गंभीर विषय बनता जा रहा है. ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के कैलिफ़ॉर्निया और हवाई के बीच प्रशांत महासागर में क़रीब 80 हज़ार टन प्लास्टिक मलबा पाया गया है. बताया जा रहा है कि कचरा समुद्र में लगभग 16 लाख वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है. वैज्ञानिकों का कहना है कि कचरे में प्लास्टिक के 18 हज़ार करोड़ छोटे-बड़े टुकड़े भी पाये गए हैं. इतना ही नहीं, प्रशांत महासागर में फैला ये कूड़ा पहले से करीब 16 गुना अधिक है.

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500 जंबो जेच के वज़न के बराबर महासागर में जमा कचरे का आकार फ्रांस के कुल क्षेत्रफल से भी ज़्यादा है. इसके साथ ही वैज्ञानिकों ने ये भी दावा किया है कि समुद्र में हर साल लगभग 80 लाख टन प्लास्टिक कचरा जमा हो रहा है. समुद्र के प्रदूषण का आकंलन करने लिए 2 विमान और 18 नौकाओं का इस्तेमाल किया गया. महासागर में एकत्रित हो रहे कचरे में 99.9 प्रतिशत कचरा प्लास्टिक है, जिसमें से सबसे ज़्यादा यानि 46 प्रतिशत हिस्सा मछली पकड़ने के लिए यूज़ होने वाले जाल का है.

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2015 के अध्यन के मुताबिक, इंसान द्वारा हर साल लगभग समुद्र में 8 मिलियन टन प्लास्टिक का कचरा जमा हो रहा है. वहीं अगर इसे रोका नहीं गया, तो 2025 तक इस आंकड़े में 22 प्रतिशत तक वृद्धि होने की संभावना है. वैज्ञानिक Lebreton का कहना है कि 'इसके परिणाम काफ़ी ख़तरनाक साबित हो सकते हैं. ये स्थिति Urgency को दर्शाती है.'

सच में अगर अभी नहीं संभले, तो शायद आगे इसके दुष्परिणाम झेलने पड़ सकते हैं. भलाई इसी में है कि फैक्ट्रीज़ से निकलने वाले कूड़े-कचरे को सही जगह पर फेंके. हम और आप अपने घर से निकलने वाले कचरे को, तो कूड़ा गाड़ी में आसानी से डाल ही सकते हैं.

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