'वैसे तो तुम्हारा भाई सख़्त लौंडा है, आसानी से किसी का फ़ैन नहीं बनता, लेकिन यहां 'मैं पिघल गया.' अब इंसान इस शख़्सियत का भी फ़ैन न हो, तो लोग कहेंगे 'तुझ में किस बात का Attitude है?' इतने में ही समझ गए होंगे कि आगे किसकी बात होने वाली है.

जी हां, हमारे अपने, ख़ान साहब के बेटे... ज़ाकिर ख़ान की. भाई की कॉमेडी किसने नहीं देखी. अपन ने तो तब से देखी है, जब ज़ाकिर भाई पतले हुआ करते थे. अभी तो माशाअल्लाह लोगों का प्यार पैसों की शक़्ल में झमाझम बरस रहा है.

लेकिन अपन कॉमिडियन ज़ाकिर की बात नहीं करेंगे, आज अपन शायर ज़ाकिर को सुनेंगे... जैसे ज़ाकिर अपने कॉमिडी में हंसेते-हंसते रुला देते हैं, वैसे ही अपने शायरी से नम आखों में भी 'मुस्कान की चमकान' ला देते हैं.

आपको ज़ाकिर ख़ान को कौनसा किरदार ज़्यादा पसंद है? कमिडियन, किस्सागोई या शायर... कमेंट बॉक्स में बताएं.

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