अकसर देश-दुनिया की कुछ ख़बरें आंखों में नमी और लबों पर हंसी छोड़ जाती हैं. बेंगलुरु की ये ख़बर पढ़ने के बाद आपके साथ भी कुछ ऐसा ही होगा. दरअसल, येलाहांका पुलिस थाने में तैनात 25 साल की महिला कॉन्स्टेबल संगीता एस हलिमनी ने एक नवजात बच्ची को जीवनदान दिया है, जिसे कोई सड़क किनारे लावारिस छोड़ गया था. ये लिखने से पहले काफ़ी दर्द हो रहा है कि सड़क किनारे पड़ी इस बच्ची का चींटियों ने काट-काट कर बुरा हाल कर दिया था.

किस्सा बीते बुधवार का है. सुबह जीवीवीके कैंपस के बाहर बच्ची की ठंड से बुरी हालत थी, किसी तरह से उसे नज़दीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसे कॉन्स्टेबल संगीता ने अपना दूध पिला कर मां का फ़र्ज अदा किया. कॉन्स्टेबल के आने से पहले तक बच्ची को फ़ॉर्म्युला मिल्क और आईवी फ़्लुइड दिया गया, ताकि उसे ज़िंदा रखा जा सके.

वहीं TOI से बातचीत के दौरान संगीता ने कहा कि इस बच्ची को देख कर मुझे मेरी बेटी की याद आ गई, उसे देखते ही मुझे उसे दूध पिलाने की इच्छा हुई. तभी मैंने डॉक्टर्स से बच्ची को दूध पिलाने की इज़ाज़त ली. हालांकि, चींटियों के काटने के बावजूद बच्ची बिल्कुल ठीक दिख रही थी. आगे वो कहती हैं कि मुझे समझ नहीं आ रहा है कि जिस बच्ची की लोग इतनी तारीफ़ कर रहे हैं, उसे कोई लावारिस छोड़ कर कैसे जा सकता है.

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इसके साथ ही येलाहांका जनरल हॉस्पिटल की मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. असमा तबस्सुम का कहना है कि 2.7 किलो की नवजात ठंड की वजह से हाइपोथर्मिया से पीड़ित थी, कॉन्स्टेबल ने अपना दूध पिला कर उसे संक्रमण का शिकार होने से बचा लिया. डॉ. असमा ने ये भी बताया कि ग्लूकोज की कमी की वजह से बच्ची की सेप्टिसीमिया की चपेट में आ सकती थी, जिस वजह से उपचार के लिये वनविलास अस्पताल में शिफ़्ट कर दिया गया था. वहीं वनविलास अस्पताल के डॉक्टर रविंद्रनाथ मेति का कहना है कि अभी भी बच्ची को सेप्टिसीमिया का ख़तरा बना हुआ है, हालांकि उसकी हालत पहले से बेहतर है.