एक क्रिकेटर के तौर पर इमरान ख़ान नियाज़ी का करियर कैसा था, ये सब को पता है. उन्होंने पाकिस्तान क्रिकेट को उसका स्वर्णकाल दिखाया था. पाकिस्तान ने इमरान ख़ान की अगुवाई में ही 1992 का क्रिकेट वर्ल्ड कप जीता था. क्रिकेट ने इमरान ख़ान को पाकिस्तान का स्टार बना दिया था. वो पाकिस्तान के लिए एक क्रिकेटर के अलावा, फ़ैशन आईकॉन भी थे. क्रिकेट छोड़ने के बाद इमरान ख़ान सामाजिक कार्यों से जुड़ गए. उनके ट्रस्ट ने पाकिस्तान का पहला कैंसर अस्पताल बनावाया था.

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1996 में उन्होंने राजनीतिक पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ बनाई, यहां से उनके राजनीतिक सफ़र की शुरुआत होती है, जो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के पद तक पहुंच चुकी है.

इन पांच चुनावों में है इमरान खान का एक नेता से PM के पद के लिए लड़ने का सफ़र:

1997 आम चुनाव

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1996 में पार्टी की स्थापना हुई थी और लगभग एक साल बाद 1997 के आम चुनाव में इस पार्टी ने बिना किसी पुख़्ता तैयारी के हिस्सा लिया. नतीजा वही, जिसका अंदाज़ा था. पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली, ख़ुद इमरान ख़ान को दो सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था. हालांकि इस चुनवा में पार्टी के लिए जो अच्छी बात रही वो ये थी, कि उसे कुले पड़े वोटो में से 1.7% प्रतिशत वोट मिले थे. एक साल पुरानी पार्टी के लिए ये एक बड़ी जीत थी.

2002 आम चुनाव

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इस चुनाव से पहले इमरान ख़ान के अनुसार परवेज़ मुशरफ़ ने उन्हें अपनी ओर से प्रधानमंत्री का उम्मीदवार बनने का ऑफ़र दिया था, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया. आपको बता दें कि इमरान ख़ान ने 1999 में हुए सैनिक तख़्ता पलट का समर्थन किया था. इसे वो भ्रष्टाचार मिटाने और व्यवस्था को सुधारने के लिए ज़रूरी बता रहे थे. इस तख़्तापलट में ही परवेज़ मुशर्रफ़ का नाम सामने आया था.

2002 में हुए चुनाव में पार्टी का प्रदर्षण अच्छा नहीं रहा, पार्टी को कुल पड़े वोट्स का 0.8 प्रतिशत मिला. इस चुनाव की एक बात जो अच्छी रही वो ये कि पार्टी अध्यक्ष इमरान ख़ान Mainwali चुनाव क्षेत्र से चुने गए.

2008 आम चुनाव

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2008 के चुनाव से पहले इमरान खान ने 2 अक्टूबर, 2007 को सांसद के पद से इस्तीफ़ा दे दिया था. उनके साथ-साथ 85 और सांसदों ने इस्तीफ़ा दिया था. विपक्षी पार्टियों का आरोप था कि परवेज़ मुशरफ़ बिना त्यागपत्र दिये चुनाव में हिस्सा ले रहे हैं. परवेज़ मुशरफ़ ने देश में आपातकाल की घोषणा कर दी और 3 नवंबर को इमरान ख़ान को नज़रबंद कर दिया गया. बाद में इमरान भाग कर अंडरग्राउंड हो गए.

आगामी चुनाव में हो रही धांधलियों को देखते हुए इमरान ख़ान ने चुनाव का बहिष्कार किया. उनकी पार्टी इस आम चुनाव का हिस्सा नहीं बनी.

2013 आम चुनाव

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इस चुनाव ने तहरीक-ए-इंसाफ़ पार्टी के इतिहास में सुनहरा अध्याय जोड़ दिया. इमरान ख़ान ने पूरे पाकिस्तान में घूम-घूम कर रैलियां कीं, अपने घोषणा पत्र से वोटरों को लुभाया. आवाम भी तहरीक-ए-इंसाफ़ में पाकिस्तान का भविष्य देख रही थी.

11 मई, 2013 को चुनाव संपन्न हुए और परिणाम में नवाज़ शरीफ़ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग को पूर्ण बहुमत हासिल हुआ. पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ मुख्य विपक्षी पार्टी बन कर उभरी.

पार्टी को 16.9% वोट और 35 सीटें मिलीं, इमरान ख़ान ने चार सीटों से चुनाव लड़ा था, जिसमें से तीन में उनकी जीत हुई.

2018 आम चुनाव

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नवाज़ शरीफ़ को प्रधानमंत्री पद से हटाये जाने के बाद से पाकिस्तान का ये चुनाव बेहद दिलचस्प हो गया. हाफ़िज़ सईद ने भी इस चुनाव में अपने प्रत्याशी उतारे थे, बिलावल भुट्टो पर भी लोगों की नज़र थी. इन सब के बावजूद, जो परिणाम सामने आए वो सब को चौंकाने वाले हैं. इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ सबसे बड़ी पार्टी बन कर ऊभरी है.

ताज़ा आकड़ें बता रहे हैं कि इमरान को लगभग 120 सीटों पर जीत मिलनी तय है. हालांकि बहुमत के लिए 137 सीटों पर जीत ज़रूरी है. विशेषज्ञों के अनुसार, इमरान को कम पड़ रही सीटों के लिए दूसरी पार्टियों से समर्थन जुटाने में दिक्कत नहीं होगी. कुल मिला कर इमरान ख़ान नियाज़ी का पाकिस्तान का अगला प्रधानमंत्री बनना तय है.

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