शनिवार सुबह गुरुग्राम के फ़ाज़िलपुर बादली गांव के लोगों के लिए ऐसी रही, जिसे वो दोबारा याद नहीं करना चाहेंगे. गांव के ही रहने वाले राजबीर यादव हर सुबह की तरह ही शनिवार को अपने खेतों में काम करने के लिए पहुंचे थे. खेतों में पहुंच कर उस समय उनके होश उड़ गए, जब उन्होंने चट्टान का एक बड़ा टुकड़ा खेत के बीचों-बीच पाया. ये चट्टान इतनी ज़ोरदार तरीके से ज़मीन पर गिरी थी कि इसके आस-पास एक बड़ा गड्ढा हो गया था. राजबीर को लगा शायद ये चट्टान अंतरिक्ष से गिर कर यहां पहुंची है. उन्होंने तुरंत इसकी ख़बर गांव वालों को दी, जो कुछ ही समय में उनके खेत में इकट्ठा हो गए.

बर्फ़ की तरह पारदर्शी इस चट्टान को लेकर गांव वालों में तरह-तरह की चर्चा होने लगी. कोई इसे उल्का-पिंड बताने लगा, तो किसी ने इसे ख़ास तरह का खनिज कहा. कुछ ऐसे भी लोग थे, जो इसे कोई भूवैज्ञानिक ख़ज़ाना भी मान रहे थे. इस वजह से लोगों में इस ख़ज़ाने को ले कर भगदड़-सी मच गई. लोग इसके टुकड़ों को अपने-अपने कपड़ों में ले कर घर की तरफ़ दौड़ पड़े. चट्टान के ये टुकड़े बर्फ़ की तरह ठंडे थे इसलिए लोगों ने इन्हें फ्रि़ज में रख दिया और अपने रोज़मर्रा के कामों में लग गए.

इस बीच ये ख़बर स्थानीय एडमिनिस्ट्रेशन तक भी पहुंच गई, जो इंडिया मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट और नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के साथ घटना स्थल पर पहुंच गई. बर्फ़ की तरह दिखने वाली इस चट्टान के टुकड़ों की गहन जांच के बाद एडमिनिस्ट्रेशन ने पाया कि ये कोई उल्का-पिंड या खनिज नहीं, बल्कि Blue Ice है. Blue Ice हवाई जहाज़ में जमे हुए टॉयलेट अवशेष को कहते हैं, जो लीक हो कर खेतों में गिर गए थे.

पटौदी के सबडिविज़नल मजिस्ट्रेट विवेक कालिया का कहना है कि 'हमारा अनुमान है कि ये हवाई जहाज़ से गिरे इंसानी मल के अवशेष हैं. इसके बावजूद हमने इन्हें भोंडसी के फॉरेंसिक लैब भेजा है, जिससे कि सब साफ़ हो जाये.'

Source: indiatimes

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