भारत में राजनीति कोई मज़ाक का काम नहीं है. छोटे से छोटे चुनाव पर यहां करोड़ों फूंक दिए जाते हैं. जन-संपर्क कंपनियों की सेवाएं ली जाती हैं. लुभावने वादे किए जाते हैं. उम्मीदवारों के ऊपर हर चुनाव में कुछ नया करने का प्रेशर होता है. ऐसे-ऐसे स्लोगन गढ़े जाते हैं, जो सुनते ही ज़ुबान पर चढ़ जाएं और लोगों के सिर चढ़ कर बोले. कई बार वोटरों को स्लोगन याद रह जाते हैं चुनावी वादे भूल जाते हैं. हम भारतीय चुनाव के इतिहास से कुछ चुन्निंदा चुनावी स्लोगन छांट कर लाए हैं, जिन्होंने चुनावों का रुख पलट दिया.

1. जन संघ को वोट दो, बीड़ी पीना छोड़ दो
बीड़ी में तंबाकू है, कांग्रेस-वाला डाकू है

भारतीय जन संघ ने 1967 के चुनाव में इस स्लोगन के माध्यम से वोटरों से ये अपील की थी कि वो कांग्रेस और तंबाकू त्याग दें.

2. Progress Through Congress

इस चुनाव अभियान के ज़रिए कांग्रेस खु़द को विकास का चेहरा बता रही थी. ये 1960 के चुनाव की बात है.

3. Congress Or Progress?

कांग्रेस के अभियान के जवाब में शिव सेना ने कुछ इस तरह से अभियान चलाया.

4. जय जवान, जय किसान

1965 में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने ये नारा दिया था. इस नारे के माध्यम से वो किसान और फ़ौज का मनोबल बढ़ाना चाहते थे.

5. Vote For Calf And Cow, Forget All Others Now.

कांग्रेस पार्टी का चुनावी चिन्ह 'बैल' हुआ करता था, लेकिन इंदरा गांधी ने पार्टी से अलग होकर अपनी अलग राजनीतिक पार्टी बना ली, जिसका चुनाव चिन्ह 'गाय और बछड़ा' था. ये भी 1960 के चुनाव के दौरान की घटना है. तब राजनीतिक गलियारे में ये मज़ाक चलता था की नई वाली कांग्रेस के चुनाव चिन्ह, 'गाय और बछड़ा' संजय गांधी और इंदिरा गांधी से प्रेरित हैं.

6. ये देखो इंदिरा का खेल, खा गई सरकार, पी गई तेल

जन संघ का चुनावी अभियान कांग्रेस राज में बढ़ी महंगाई के ऊपर केंद्रित थी. इसे वो जनता तक मज़ेदार स्लोगन तक पहुंचाना चाहते थे.

7. गरीबी हटाओ, इंदिरा लाओ, देश बचाओ

1971 के आम चुनाव में इंदिरा गांधी की गरीबी मिटाने के वादे को इस स्लोगन से काफ़ी बल मिला था.

8. इंदिरा हटाओ, देश बचाओ

जनता पार्टी के जयप्रकाश नारायण ने अपने इस नारे से इंदिरा गांधी को उन्हीं की ज़ुबान में जवाब दिया था.

9.एक शेरनी, सौ लंगूर, चिकमंगलूर भाई चिकमंगलूर

कांग्रेसी कवी श्रीकांत वर्मा ने 1978 के चुनाव में इंदिरा गांधी के लिए इस नारे को बनाया था. इससे वो विपक्षी पार्टियों के गठबंधन क मज़ाक बना रहे थे.

10. जब तक सूरज चांद रहेगा, इंदिरा तेरा नाम रहेगा

जब इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गई, तब 1984 के चुनाव में कांग्रेस ने इस नारे को इस्तेमाल किया. संवेदना की लहर पर बैठ कर कांग्रेस ने रिकॉर्ड जीत दर्ज की थी.

12. जब तक रहेगा समोसे में आलू, तब तक रहेगा बिहार में लालू

इस मज़ाकिया नारे ने बहुत काम किया. लालू प्रसाद यादव ने इस नारे से अपनी जड़ें जमाई थी.

12. बच्चा बच्चा राम का, जन्मभूमी के काम का

विश्व हिन्दू परिषद ने इस सारे नारे ज़रिए देश में सांप्रदायिकता की और धकेल दिया.

13. मिले मुलायम-कांशीराम, हवा हो गए जय श्री राम

ये नारा तब लगाया जब अयोध्या में विवादित ढांचा तोड़ दिया गया. मुलायम सिंह और कांशीराम ने गठबंधन कर सरकार बनाई.

14. जात पर न पात पर, मोहर लगेगी हाथ पर

1996 के आम चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव ने कांग्रेस की राजनैतिक दृष्टिकोण जनता तक पहुंचाने की कोशिश की थी.

15. बारी बारी सब की बारी, अब की बारी अटल बिहारी

1996 में लखनऊ के चुनावी रैली में भाजपा की ओर से ये नारा दिया गया.

16. जांचा, परखा, खरा

1999 के आम चुनाव में भाजपा ने अटल बिहारी की साफ़-सुथरी छवी को भुनाने की कोशिश की थी.

17. सोनिया नहीं ये आंधी है, दूसरी इंदिरा गांधी है

सोनिया गांधी की छवि को बढ़ाने के लिए कांग्रेस द्वारा ये नारा उछाला गया था. 2009 के चुनाव में कांग्रेस सोनिया गांधी को इंदिरा गांधी के समक्ष खड़ी कर रही थी.

18. यूपी में है दम, क्योंकि जुर्म है यहां कम

अमिताभ बच्चन ने समाजवादी पार्टी को क्लिन चिट देते हुए ये कहा कि उत्तरप्रेदश में क्राइम रेट बहुत कम है.

19. यूपी में था दम, लेकिन कहां पहुंच गए हम

कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी के नारे का जवाब अपने चुनावी नारे से दिया.

20. पूरी रोटी खाएंगे, 100 दिन काम करेंगे, दवाई लेंगे और कांग्रेस को जिताएंगे

एक जनजातीये रैली को संबेधित करते हुए राहुल गांधी ने चुनाव अभियान के लिए ये नारा दिया था

21. अबकी बार, मोदी सरकार

2014 का चुनाव की याद अभी सब के ज़ेहन में ताज़ा ही होगा. इसे लोगों ने काफ़ी पसंद किया था. इस नारे को एक दूसरे चुनावी नारे 'अच्छे दिन आने वाले हैं' का साथ मिला था.

इन नारों को देख कर ये बात तो कह ही सकते हैं, कि सरकारें बनती भी नारों से हैं, गिरती भी नारों से हैं.

Source: scoopwhoop