8 नवंबर 2016 के बाद भारत के हर आदमी के नज़रिये में जितना डिफरेंस आया है, वो आज तक एक साथ कभी नहीं देखा गया. नोटबंदी पर सरकार के इस एक फ़ैसले ने सभी भारतीयों की ज़िन्दगी में जो उथल-पुथल मचाई है, वो पहले कभी नहीं हुआ.

अभी तक छल्लों की तरह उड़ने वाले 100 के नोट के लिए एक अब मन में एक अलग-सी रिस्पेक्ट आती है. वो चीज़ें, जो पहले बस नज़रअंदाज़-सी कर दी जाती थीं, अब बहुत ज़रूरी लगने लगी हैं.

हालांकि, हम सभी को इस फ़ैसले के बाद से कई परेशानियां उठानी पड़ रही हैं, फ़िर भी, इस नोटबंदी के कई अच्छे इफ़ेक्टस भी सामने आये:

1. अब Walk कर लेते हैं

Source: Verified

ज़माना हो गया था, वॉक किये हुए. शाम को थोड़ा टहलने की आदत ऐसी छूटी कि भूल गए थे, सर्दियों में वॉक करने की अपनी ही फील होती है. ऑफिस के लिए घर से निकलते ही 'ऑटो' चिल्लाने की आदत पड़ गयी थी. पैसे बचाने के चक्कर में अब मेट्रो से ऑफिस का रास्ता पैदल तय करते हैं. शाम को वापस आते हुए भी थोड़ी वॉक हो जाती है.

2. सिगरेट कम हो गयी है

Source: Ekplate

बात-बात पर सुट्टा ब्रेक लेने वालों ने अब कुछ टाइम के लिए सुट्टे से ही ब्रेक ले लिया है. खुल्ले रुपये सबको प्यारे होते हैं, इसलिए सिगरेट सैक्रिफाइस करनी ही पड़ी. देहरादून से पब्लिश हुई टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के हिसाब से इस फैसले के बाद से सिगरेट सेल में इतनी कमी आयी है कि 8 नवम्बर के बाद अगले तीन दिन तक कुछ दुकानों पर लोग सिगरेट लेने नहीं गए.

तंबाखू के भयानक Ad और उनमें आने वाले मुकेश हराने भी वो नहीं कर पाए, जो कड़की ने करवा दिया.

3. शॉपिंग बस ज़रूरत भर की

Source: Recovering Shopaholic

दुकानों में कुछ ऐसे चुम्बक लगे होते हैं, जो एक औरत को देखते ही उसे अंदर खींच लेते हैं. वो ना चाहते हुए भी हाथ में एक शॉपिंग बैग ले ही आती है. पर कुछ दिनों से सीन बदल गया है. शॉपिंग सिर्फ़ ज़रूरत की चीज़ों की होती है, ज़रूरत जैसे राशन और रोज़मर्रा का सामान. अब अलमारी में पड़े कपड़े कम नहीं, बहुत ज़्यादा लगते हैं. मैंने कल ही वो स्टोल निकाला, जो तीन सर्दियों से पड़ा था, पर पहने जाने के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाया. पुराने कपड़े आजकल ट्रेंड में हैं!

4. Savings करनी आ गयी है

Source: Tumblr

100 रुपये के नोट बचाने के चक्कर में सेविंग्स करने की आर्ट सीख ली. जब से नौकरी लगी थी, मां-बाप इंतज़ार कर रहे थे कि अब सेविंग्स करना सीखूंगी, मोदी जी के राज में वो भी सीख लिया. पता चल गया कि ज़रूरतें पूरी करने के बाद भी पैसे बचाये जा सकते हैं.

5. पार्टी-शार्टी बंद हो गयी हैं

Source: Good Call

केरल में इस फ़ैसले के बाद अल्कोहल की डिमांड में ख़ासा डिफरेंस आया है. लोग पार्टीज़ में न तो जा रहे हैं, न ही कर रहे हैं. दिल्ली सरकार ने वैसे भी खुले में शराब पीने पर पाबंदी लगा कर सख्ती कर दी है, यानि आधे लोगों का 'कारो-बार' तो वैसे ही ठप हो गया होगा.

6. बाहर से खाना ऑर्डर करने की कोई सोचता भी नहीं

Source: Blogspot

लगता है, वो एक ज़माना ही था, जब खाने न बनाने के मूड में सीधे पिज़्ज़ा ऑर्डर कर लिया जाता था. या फिर फटाफट App डाउनलोड कर कुछ ऑर्डर कर लिया जाता था. अब चुपचाप तसल्ली से दाल-रोटी खायी जा रही है और सबको उसी में स्वाद आ रहा है. एक दोस्त कह रहा था, 'मां कह-कह कर थक गयी कि मैदा खाना छोड़ दो लेकिन नहीं सुनी. नोटबंदी ने वो भी करवा दिया.

7. मजबूरी में ही सही, लोग सादगी से शादियां कर रहे हैं

Source: Grace

जिस देश को उसकी बिग फैट वेडिंग्स के नाम से दुनिया जानती है, उस देश में शादी और सादगी का कोई लेना-देना नहीं है. लोग क़र्ज़ ले कर मोटी शादियां करते हैं. लेकिन इसे पैसों की किल्लत ही कहा जाएगा कि पहली बार लोग शादियों में फ़िजूलखर्ची नहीं कर रहे और किसी को बुरा भी नहीं लग रहा है. शादियां बिना हंगामे के निपट रही हैं.

ख़ुशी है, देर से ही सही, किसी बेटी का बाप चैन की नींद सो पाएगा.

8. महीना ख़त्म होने वाला है और अकाउंट में अभी भी पैसे बचे हैं

Source: Livemint

महीने के आखिर में 500 के आखरी नोट से अपनी अपनी गरीबी दिखाते हम Urban Poor सबसे ज़्यादा खुश हैं. Month End में अकाउंट में पैसे बचते भी हैं, ये हमें आज पता चला. ये अलग तरह की ख़ुशी है.

नोटबंदी को लेकर देश में सबकी अलग-अलग राय है. ATM में लाइन लगा कर खड़े रहना किसी को अच्छा नहीं लगता, पर इस मुश्किल में कई अच्छी बातें सीख लीं. पैसों के बारे में, ख़ुद के बारे में हुए नए खुलासों से कम से कम मैं तो बहुत खुश हूं.

Featured Photo Credits: Pratyush Chaurasia