20वीं सदी के महान हिंदी कथाकार प्रेमचंद ने जो समाज को अपनी कृतियों से दिया, वो शायद ही कोई और लेखक उनके जाने के बाद दे पाया हो. उनकी कृतियां मसलन गोदान, गबन, सेवा सदन समाज के एक ऐसे हिस्से की बात करती हैं, जो उस दौरान बहुत ही दबा कुचला या यह कहें कि हाशिए पर पड़ा था. प्रेमचंद एक ऐसे लेखक हैं जिनको जितना पढ़ा जाये वो कम है. उन्होंने अपनी आंखों से जो हालात देखे थे, उन्हें शब्द दिये, हर्फों पर उतारा और उनका व्यवहार भी इससे अछूता नहीं रहा.

यहां हम उनके जीवन की किताब से संबंधित कुछ बातें बता रहे हैं.

1. इनका जन्म 31 जुलाई 1880 को बनारस (वाराणसी) के पास लम्ही गांव में हुआ.

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2. मैट्रिक पास करने के बाद ही प्रेमचंद बतौर शिक्षक एक सरकारी स्कूल में नियुक्त हो गये थे.

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3. उनकी प्रथम कहानी का नाम “सौत” था, जो 1915 में सरस्वती पत्रिका में प्रकाशित हुई थी.

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4. प्रेमचंद का पहला उपन्यास “असरारे मआबिद” था, जिसे उर्दू भाषा में लिखा गया था.

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5. साल 1921 में महात्मा गांधी के कहने पर उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी थी.

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6. देश के प्रति अपार प्रेम होने के कारण प्रेमचंद के एक उपन्यास “सोजे-वतन” को ब्रिटिश सरकार ने जब्त कर लिया था और आगे से उन्हें ऐसा लिखने के लिए मना किया था.

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7. साल 1930 में उन्होंने “हंस” मासिक पत्रिका शुरू की थी. गौरतलब है कि आज़ादी के बाद "हंस" को राजेंद्र यादव ने फिर से प्रकाशित करना शुरु किया था. हंस आज तक प्रकाशित हो रही है.

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8. 1932 में प्रेमचंद ने “जागरण” नाम की एक पत्रिका का प्रकाशन भी शुरु किया था. इसके साथ-साथ "मर्यादा” और “माधुरी” पत्रिका का भी संपादन कार्य किया.

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9. उन्होंने एक हिंदी फ़िल्म “मजदूर” की स्किप्ट भी लिखी थी. यह 1934 के आस-पास की बात है.

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10. तमाम दुनिया में उनकी साहित्यक कृतियों का अनुवाद उपलब्ध है. उन्होंने 300 से ज़्यादा कहानियों के साथ, कई नाटक और तकरीबन 15 उपन्यास लिखे.

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11."गोदान" उनका एक ऐसा कालजयी उपन्यास है, जो आज भी प्रासंगिक प्रतीत होता है.

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12. पहले प्रेमचंद घनपत राय के नाम से लिखते थे. वो आर्य समाज से काफ़ी प्रभावित थे. उन्होंने अपने दौर में विधवा विवाह का भी जोरदार समर्थन किया था.

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जीवन के तमाम पन्नों को पढ़ने के बाद लंबी बीमारी के दौर से गुजर कर 8 अक्टूबर 1936 को प्रेमचंद के जीवन का उपन्यास खत्म हो गया. मरने से पहले वो "मंगलसूत्र" नाम का उपन्यास लिख रहे थे, जिसे बाद में उनके बेटे अमृत राय ने पूर्ण किया.