4 जून, 1946 को आंध्रप्रदेश (तब मद्रास) के सिम्हापुरी में जन्मे एस.पी. बालासुब्रमण्यम आज 72 साल के हो गए हैं. इस प्लेबैक सिंगर ने अपने जीवनकाल में भारत की 16 भाषाओं में लगभग 40 हज़ार गाने रिकॉर्ड किए हैं. इसके अलावा बालासुब्रमण्यम ने कई कलाकारों के लिए डबिंग का काम भी किया है. इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़ कर उन्होंने संगीत की ओर कदम रखा था. अपने कॉलेज के दिनों में मिल रहे प्रोत्साहन की वजह से वो पूरी तरह इस दिशा में आगे बढ़ गए.

बालासुब्रमण्यम 1966 में फ़िल्म इंडस्ट्री में दाखिल हुए थे, Sri Sri Sri Maryada Ramanna पहली फ़िल्म थी जिसके लिए उनकी आवाज़ रिकॉर्ड हुई थी. 1981 में उन्होंने पहली हिन्दी फ़िल्म एक दूजे के लिए प्लेबैक सिंगिंग गाया था. इसके लिए उन्हें राष्ट्रिय पुरस्कार भी मिला था. 1989 में उन्होंने सलामान खान की फ़िल्म मैंने प्यार किया के लिए गाया था. इसके बाद से वो सलमान की आवाज़ बन गए थे. 'दिल दीवाना' गीत के लिए उन्हें फ़िल्म फ़ेयर अवॉर्ड मिला था.

एक वक़्त था जब बालासुब्रमण्यम दिन में 21-20 गानों की रिकॉर्डिंग किया करते थे. उनके नाम सबसे अधिक फ़िल्मी गीत गाने का गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज है. पार्शव गायक के अलावा, उनकी पहचान एक डबिंग आर्टिस्ट को तौर पर भी है. उन्होंने कमल हसन, रजनीकांत, अनिल कपूर और बेन किंग्सले के लिए अपनी डबिंग की है.

संगित के क्षेत्र में बालासुब्रमण्यम की कोई ख़ास ट्रेनिंग नहीं हुई है, इसके बावजूद उन्होंने इस कला में शोहरत की बुलंदियां छुई हैं. बालासुब्रमण्यम को मिले पुरस्कारों की लिस्ट इतनी लंबी है कि एक बार में बताई नहीं जा सकती. प्ले बैक सिंगिंग के लिए उन्हें 6 बार राष्ट्रिय पुरस्कार, 25 बार आंध्र प्रदेश और कई अन्य राज्य सरकार अवॉर्ड मिले हैं. संगीत के क्षेत्र में बालासुब्रमण्यम के अतुलनीय योगदान को देखते हुए पद्म भूषण सम्मान दिया गया.

हिन्दी सिनेमा के लिए उन्होंने आख़िरी गाना 'चन्नेई एक्सप्रेस' में गाया था. इस फ़िल्म के लिए उन्होंने 15 साल बाद वापसी की थी.