अकसर ही माता-पिता बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और उनकी ख़्वाहिशों को पूरा करने के लिये, अपने कीमती गहने बेच देते हैं. पुणे के एक कपल ने भी कुछ ऐसा ही किया. बस फ़र्क इतना है कि इस दंपत्ति ने ये फ़ैसला बच्चों के लिए नहीं, बल्कि देश के सैनिकों के लिए लिया है.

पुणे के रहने वाले सुमेधा और योगेश चित्ताड़ नामक बुज़ुर्ग दंपत्ति ने सराहनीय कदम उठाते हुए, सियाचिन में तैनात जवानों की मदद के लिए अपने गहने बेच डाले. दरअसल, सियाचिन में ऑक्सीजन की कमी के चलते, वहां ऑक्सीजन संयंत्र की आवश्यकता है. सैनिकों की इसी ज़रूरत को पूरा करने के उद्देश्य से ये कपल गहनों को बेच, 1.25 लाख रुपये की रकम जुटाने में कामयाब रहा. सुमेधा पेशे से टीचर हैं और उनके पति भारतीय वायुसेना के रिटायर्ड अफ़सर.

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सुमेधा 1999 से सेना कल्याण के लिए काम कर रही हैं. इसके साथ ही वो कभी-कभी स्कूल-कॉलेजों में लेक्चर दे कर, छात्रों और युवाओं को सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित भी करती हैं.

ANI से बातचीत के दौरान वो कहती हैं कि 'सियाचिन जैसे दुर्गम इलाके में सैनिकों की तकलीफ़ें जानने के बाद, मैंने ऐसा करने का निर्णय लिया'. आगे वो कहती हैं कि 'मैंने ये कभी नहीं सोचा कि दूसरों ने आर्मी के लिए, क्या किया और क्या नहीं. मैं जवानों की मदद करना चाहती थी, इसलिए मैंने अपने अाभूषण बेच दिये'.

वहींं वायुसेना के पूर्व अधिकारी योगेश का कहना है कि 'ये उनकी पत्नी का सबसे बड़ा बलिदान था.' उन्होंने ये भी कहा कि 'आगे और पैसों की आवश्यकता पड़ेगी.' बता दें कि वर्तमान में सियाचिन में केवल एक ऑक्सीजन संयंत्र मौजूद है.

अगर आज हम अपने घरों में चैन की सांसें ले रहे हैं, तो इसका श्रेय देश के जवानों को जाता है. सरहद पर हमारी रक्षा करते हुए, देश के न जाने कितने जवान अपनी जान कुर्बान कर देते हैं. वहीं एक स्त्री के लिए गहने उसकी अमानत होते हैं, इसीलिये सुमेधा का ये फ़ैसला वाकई क़ाबिले-ए-तारीफ़ है. ऐसे में हमारी तरफ़ से सुमेधा और देश के सभी जवानों को सलाम!

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