नोटबंदी पर कड़ा विरोध जताने वाले और भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन को इस साल का अर्थशास्त्र नोबेल पुरस्कार मिल सकता है. दरअसल, वॉल स्ट्रीट जनरल की रिपोर्ट के अनुसार 'Clarivate Analytics' द्वारा तैयार संभावित 6 उम्मीदवारों की सूची में राजन का नाम भी शामिल है.

Clarivate Analytics पहले थॉमसन रायटर से जुड़ी एक संस्था थी. ये संस्था ऐकैडेमिक और साइंटिफ़िक रिसर्च करती है, इसके साथ ही नोबेल पुरस्कार की औपचारिक घोषणा से पहले संभावितों के नाम का ऐलान करती है. Nobelprize.org के अनुसार, सोमवार यानि 9 अक्टूबर को Stockholm में अर्थशास्त्र के लिए नोबेल पुरस्कार की घोषणा की जाएगी. वहीं राजन इस समय शिकागो विश्वविद्यालय में बूथ स्कूल ऑफ़ बिजनेस में प्रोफे़सर के पद पर कार्यरत हैं.

Clarivate Analytics ने कहा कि अर्थशास्त्र के क्षेत्र में इन लोगों के रिसर्च महत्व और उपयोगिता की दृष्टि से नोबेल की श्रेणी के हैं. वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पिछले 15 सालों में उसके चुने गए अर्थशास्त्रियों में से 45 नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकित हुए.

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बता दें, रघुराम राजन ने वर्ष 2008 में आई अमेरिका में मंदी की भविष्यवाणी बहुत पहले ही कर दी थी, जिसका असर पूरी दुनिया पर हुआ था. इतना ही नहीं, उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर के तौर अपने कार्यकाल ख़त्म करने के बाद प्रकाशित हुई किताब 'आई डू व्हाट आई डू' में ख़ुलासा करते हुए कहा था कि 2016 की फरवरी में उन्होंने नोटबंदी के प्रस्ताव का विरोध जताया था, साथ ही उन्होंने ये भी कहा था कि लंबे समय के अंतराल पर इसका फ़ायदा हो सकता है, लेकिन फ़िलहाल अल्प अवधि में इससे अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचेगा, लेकिन सरकार ने राजन के सुझाव ख़ारिज़ कर दिया और 8 नवंबर 2016 को 500 और 1000 के नोट बंद करने का एेलान किया.

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ग़ौरतलब है, साल 2013 में यूपीए सरकार में राजन को RBI गवर्नर बनाया गया था, राजन RBI में अपने कार्यकाल को आगे ज़ारी रखना चाहते थे, लेकिन सत्ताधारी एनडीए सरकार की ओर से उन्हें दोबारा मौका नहीं दिया गया. RBI के गवर्नर के तौर पर राजन के तीन साल का कार्यकाल 4 सितंबर 2016 को पूरा हो गया था.

बता दें, रघुराम राज को साल 2013 में रुपए को संकट से उबारने में किए गए योगदान के लिए ब्रिटिश पत्रिका सेंट्रल बैंकिंग का सेंट्रल बैंकर ऑफ़ द ईयर पुरस्कार भी मिल चुका है.

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