रमेश सिप्पी, हिंदी सिनेमा का वो कलाकार, जिसको अपने पात्रों, किरदारों और कथानक से दर्शकों को बांधने की कला में महारथ हासिल थी. फ़िल्मों के इस जादूगर ने शोले, सीता और गीता, शक्ति, शान, सागर जैसी सुपरहिट बनाई और लोगों में अपनी एक अलग पहचान बनाई.

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सिप्पी साहब ने टीवी पर आने वाले धारावाहिकों में भी अपना एक अलग मुक़ाम बनाया. हांलाकि उन्होंने एक ही धारावाहिक बनाया और वो था 'बुनियाद'.

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आज हम सिप्पी साहब के जन्मदिन पर उनके लोकप्रिय सीरियल बुनियाद की बात करेंगे, क्योंकि फ़िल्मों की बातें तो सब ही करते हैं. ख़ासकर के उनकी आइकॉनिक फ़िल्म शोले की. बुनियाद दूरदर्शन का वो धारावाहिक जिसने परिवारों को एक डोर में बांधने का काम किया. बुनियाद के लिए ये बात कहना ग़लत नहीं होगा कि रामायण और महाभारत जैसी पौराणिक गाथाओं का भारत के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन जो असर पड़ा था, उससे ज़्यादा व्यापक असर दर्शकों पर 1987 में दूरदर्शन पर दिखाए जाने वाले बुनियाद का उस दौर के लोगों पर हुआ था. बुनियाद ने परिवारों को जोड़ने का काम किया. 1947 में हुए भारत-पाकिस्तान विभाजन पर आधारित बुनियाद को देखने के लिए भारत-पाकिस्तान में लोग टीवी सेट पर आंखे गाड़ कर बैठ जाते थे.

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भारत में ये सीरियल तब प्रसारित हुआ, जब कई सीरियल्स अपनी सशक्त कहानी और पात्रों के दम पर आसमान की ऊंचाइयां छू रहे थे और इसने दूसरे धारावाहिकों को कड़ी टक्कर दी. उस दौर के उंगली पर गिने जने वाले धारावाहिकों को अगर छोड़ दिया जाए, तो अब तक कोई भी धारावाहिक बुनियाद की ऊंचाई तक पहुंच नहीं पाया है.

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'बुनियाद' एक ऐसा फ़ैमिली ड्रामा था, जिसकी कहानी में कई पीढ़ियों की कहानियां कही गयीं थीं. मगर ये सिप्पी साहब का ही कमाल था कि उन्होंने न सिर्फ़ चरित्रों में बहुत गहराई दिखाई, बल्कि एक दिलचस्प स्टोरीलाइन भी तैयार कराई थी. 'बुनियाद', लाहौर से आने वाले एक पंजाबी परिवार की चार पीढ़ियों की 50 सालों की महागाथा थी, जिसमें कई रोचक उप-कथाएं भी थीं.

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ये धारावाहिक मुख्य पात्रों की ज़िन्दगी और समय को बेहद मेहनत से गढ़ा गया था जिस कारण ये बेहद ख़ास बन गया था. इतना ही नहीं इसके सेट की सजावट, किरदारों के परिधान, खान-पान, गाने और भाषा, आदि उस टाइम के दौर से बखूबी मेल खाते थे और प्रामाणिक थे.

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बुनियाद के निर्देशक के तौर पर रमेश साब ने अपनी रचनात्मकता का बखूबी इस्तेमाल करते हुए इस महागाथा का निर्माण किया, जिसमें उन्होंने छोटी से छोटी बारीकी का पूरा ध्यान रखा था. इस सीरियल को एक मल्टीस्टारर फ़िल्म की तरह ही फिल्माया गया था. तभी तो सिप्पी साहब ने इसमें सभी मंझे हुआ अभिनेताओं और अभिनेत्रियों को कास्ट किया था. इसमें आलोकनाथ (हवेलीराम), अनीता कंवर (लल्लो जी, हवेलीराम की पत्नी), सुधीर पांडे, किरण जुनेजा, दिलीप ताहिर, आशा शर्मा, आशा सचदेव, कृतिका देसाई जैसे बड़े-बड़े दिग्गज कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय से धारावाहिक को रियल बनाया था.

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बुनियाद जैसे लोगों के दिलों को छूने और उनके दर्द को समझने वाले धारावाहिक को बनाने के लिए रमेश सिप्पी साहब की जितनी तारीफ़ की जाए कम है.