हमारे देश में एक बड़ी आबादी मुस्लिम लोगों की है. बहुतेरे लोग अपने धर्म का पालन इस रमज़ान के पवित्र माह में रोज़े रख कर करते हैं. पुरानी दिल्ली की इन 11 जगहों पर आपको रमज़ान के माह के दौरान एक बार ज़रूर जाना चाहिए. क्योंकि यहां के खाने का जवाब ही नहीं है जनाब.

1.गुड़ का शरबत

चूंकि मौसम भी गर्मी का है और इस मौसम में तरल पदार्थों का सेवन अधिक करना चाहिए. इसलिए इस रमज़ान के दौरान आप अजमेरी गेट के पास गुड़ के शरबत का स्वाद चख सकते हैं. पुरानी दिल्ली के मशहूर गुड़ के शरबत के चर्चे देश की सीमा पार भी होते हैं.

पता: चितली कब्र और बाज़ार मटिया महल के पास.

Source: huffingtonpost


2.पहलवान बिरयानी

कितना फ़ाड़ू नाम है न? ऐसा तो कतई नहीं है कि इसको खाने के बाद आप पहलवान हो जायेंगे, लेकिन इस बिरयानी का स्वाद अगर एक बार आपकी ज़ुबान पर लग गया, तो हर रमज़ान आप यहां जाये बगैर नहीं रह सकेगें. इसे बिरयानी मिर्च मसाला के नाम से भी जाना जाता है. इसके मालिक हाजी मोहम्मद अनवर शाम 5 बजे से ले कर लगभग रात के 2 बजे तक बिरयानी बेचते हैं. इस बिरयानी को किसी रायते की ज़रूरत नहीं है क्योंकि इसकी सादगी में ही लज़ीज स्वाद है.

पता: दुकान नंबर-701, हवेली आज़म ख़ान, जामा मस्जिद के पास.


Source:huffingtonpost

3.अमीर मिष्ठान भंडार

खाने-पीने के मामले में मिष्ठान एक ऐसा व्यंजन है जो खाने की शानो-शौकत को चार चांद लगा देता है. अमीर मिष्ठान भंडार जामा मस्जिद वाले इलाके में काफ़ी मशहूर है. यहां की बालूशाही, बेसन के लड्डू, खोया समोसा और गुलाब जामुन खाने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं. एक बार आप भी जा कर इसका स्वाद लें.

पता: 957, हवेली आज़म खान जामा मस्जिद के नजदीक.



Source: asadzaidi


4.नवाब कुरैशी का तरबूज़ शेक

उत्तर प्रदेश के रहने वाले नवाब कुरैशी सर्दियों में तो केवल फल ही बेच कर गुज़ारा करते हैं लेकिन गर्मियों और रमज़ान के माह में ये तरबूज का शेक बना कर बेचते हैं जो काफ़ी प्रसिद्ध है. लोग अमूमन इस शेक को प्यार मोहब्बत मज़ा कह कर भी पुकारते हैं. मात्र 10 रुपये का तरबूज शेक एक बार तो ट्राई करना बनता है दोस्त.

पता: 1169 के सामने, मटियामहल के नजदीक.

Source:huffingtonpost

5.Cool Point


ये 25 वर्षों पहले मोहम्मद ज़ाहिद द्वारा स्थापित किया गया था, फ़िलहाल इसे इनका लड़का ज़ोहिब चला रहा है. यहां का शाही टुकड़ा सच में ही शाही है. इसके अलावा केसर मिल्क और बादाम मिल्क भी आपको अपनी ओर आकर्षित करेगा.

पता: 973, मटियामहल जामा मस्जिद के पास.



Source:huffingtonpost

6.चंगेज़ी चिकन

1986 में इसका नाम होटल मिदोह था लेकिन 1991 में इसका नाम बदल कर चंगेज़ी चिकन रख दिया गया. यहां का चिकन दुबई में बनाये जाने वाले चिकन के अंदाज़ में बनाया जाता है. इसकी इसके अलावा कुछ और ब्रांच्स भी हैं.

पता: 2614, चुनरी वाला जामा मस्जिद के नजदीक.



Source: huffingtonpost

7.लौंग चुरी कबाब

जिस पकवान का नाम ही इतना शाही हो, उसके कहने ही क्या! हमदर्द शॉप के सामने ये लौंग चुरी कबाब मिलते हैं. शाकाहारी भोजन खाने वाले लोगों के लिए ये भरपूर आनंद है. इसे आटा, बेसन और प्याज से बनाया जाता है. दूर-दूर से लोग इसे यहां खाने आते हैं.

पता: हमदर्द शॉप के बाहर चितली कब्र के पास.


Source: huffingtonpost


8.असलम चिकन कॉर्नर

बीते 18 सालों से लोग इसके बटर चिकन की तारीफ़ करते आ रहे हैं. चिकन को स्वादिष्ठ बनाने का इसने अपना एक नया तरीका इजाद किया है. चिकन के साथ रुमाली रोटी खाने का अपना ही एक मज़ा है. इसके अलावा यहां का चिकन कबाब भी काफ़ी टेस्टी होता है.

पता: 540, मटियामहल के पास.

Source:flickr

9.कुरैशी और भाईजान का कबाब

कबाब के मामले में इनको कौन टक्कर दे सकता है? जामा मस्जिद के 1 नंबर दरवाजे से बाहर निकलते ही आपको कुरैशी का कबाब मिलेगा. ये काफ़ी तीखा और प्रोटीनयुक्त होता है.चितली कब्र के पास आप भाईजान का लज़ीज कबाब खा सकते हैं. भाईजान का कबाब डीप फ्राई होगा.

पता: गेट नंबर-1 के पास कुरैशी कबाब है और 2202 चितली कब्र के पास है भाईजान कबाब.

Source:grabhouse

10.हाजी मोहम्मद हुसैद फ्राइड चिकन

ये चालिस साल पहले स्थापित किया गया था. यहां का चिकन अपने ज़माने का KFC है. लेकिन हम इसे JFC माने Jama Masjid Fried कह सकते हैं. रमज़ान के दौरान यहां कीमा गोली भी बनाई जाती है, जो शायद ही आपको कहीं और खाने को मिले. इसके फ्राइड चिकन के साथ रुमाली रोटी और चटनी बहुत स्वाद लगती है.

पता: 113, मटियामहल जामा मस्जिद के पास.

Source: huffingtonpost


11.कालान स्वीट्स

इतना तीखा खाने के बाद आपको मीठे की ज़रूरत तो पड़ने वाली है ही. तो कालान स्वीट्स की पनीर जलेबी ज़रूर खा कर देखें. इसके अलावा यहां की गुझिया भी काफ़ी स्वादिष्ठ होती है.

पता: शॉप नंबर 4-5 जामा मस्जिद के पास.

Source:huffingtonpost

दोस्तों, रमज़ान किसी का बांटा नहीं हुआ है. ऐसा नहीं है कि ये मात्र मुस्लिम भाईयों का त्योहार है. ये अमन का, साथ का और शांति का एक पर्व है जिसमें सबको भागीदारी देनी चाहिए. यहां का खाना टेस्ट करने के बाद आर्टिकल शेयर ज़रूर करें.