सेक्शन 482 की शक्तियां बताते हुए चीफ़ जस्टिस दीपक मिश्रा के नेतृत्व वाली बेंच ने कहा है कि समझौता हो जाने के बाद भी रेप और मर्डर जैसे संगीन अपराधों के केस बंद नहीं किये जायेंगे.

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों के हाईकोर्ट्स को निर्देश दिए हैं कि गंभीर अपराधों में दोनों पार्टियों द्वारा रज़ामंदी का रास्ता अपनाने के बाद भी ऐसे मुकदमों को सुनवाई के लिए जारी रखा जाये. ऐसा इसलिए किया गया है ताकि कोर्ट संगीन मामलों को हलके में न लें.

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कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामले समाज पर गहरा प्रभाव डालते हैं, इसलिए इन पर फ़ैसला आना बेहद ज़रूरी है. रेप, मर्डर और डकैती के अलावा वित्तीय मामलों से जुड़े गंभीर अपराधों पर भी मुक़दमा जारी रखने के लिए कहा गया है.

ज़मीन विवाद के एक मामले में आरोपियों ने FIR रद्द किए जाने की मांग की थी, उनका कहना था कि फ़रियादी पक्ष ने उनसे रज़ामंदी कर ली है. अब कोर्ट ने साफ़ कर दिया है कि भले ही फ़रियादी पक्ष पीछे हटना चाहता हो पर कोर्ट अपनी कार्यवाही पूरी करेगा.

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कोर्ट ने कहा कि गंभीर मामलों में दोनों पक्ष अगर रज़ामंदी कर लेते हैं, तो आरोपी बिना सज़ा पाए क़ानून के शिकंजे से बच जाता है.

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