इंसान अलग कैसे होता? उसकी पहचान सबसे अलग कैसे होती है? इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण 'सोच' है. सोच ही इंसान को सबसे अलग बनाती है. आज हम आपको एक ऐसी कहानी से रू-ब-रू करवाने जा रहे हैं, जिसे पढ़कर आपको अच्छा लगेगा.

यह कहानी है तीन ऐसे युवाओं की, जो अपनी मेहनत और लगन से पीएम के डिजिटल इंडिया के सपनों को साकार करना चाहते हैं. राजस्थान के अलवर जिले के बहरोड़ के रहने वाले इन युवाओं का जोश महसूस करने लायक है और इनकी खोज देखने लायक है. इसके लिए इन्होंने स्कूल के दौरान ही मेहनत शुरु कर दी थी. लोग इन्हें 'RDS' के नाम से जानते हैं, जो तीनों दोस्तों का नाम है. इनका नाम है, राहुल यादव, देवेंद्र सिंह और साहिल गुप्ता है. इनकी उम्र 18-19 वर्ष है. ये तीनों दोस्त भी हैं और बिज़नेस पार्टनर भी.

इनकी कहानी की शुरुआत करते हैं, जब इन्होंने बारहवीं कक्षा पास की थी. कक्षा के दूसरे छात्रों से परे इन्होंने अपने अपना रास्ता बनाया. इसके लिए इन्होंने आगे की पढ़ाई छोड़ दी. ये समाज और अपने लिए कुछ अलग करना चाहते हैं.

अपनी सोच पर RDS ग़ज़बपोस्ट को बताते हैं

हमें देश में पढ़ाई का जो सिस्टम है वो अच्छा नहीं लगता, इसलिए हमने 12th के बाद की पढ़ाई नहीं की. हम एंटरप्रेन्योरशिप करना चाहते थे, ये हमारा सपना था, इसलिए हम निकल पड़े हमारे खुद के रास्ते पर.
पौधे और सब्जियों से बिजली बनाते हैं

RDS की इस खोज से पूरी दुनिया को बिजली दी जा सकती है. इस पर RDS कहते हैं कि कुछ दिन विचार करने पर हम एक निष्कर्ष पर आएं. हमने कुछ रिसर्च प्रोजेक्ट भी किए, जिसने पौधे से बिजली बनाना, आलू, टमाटर और नींबू से बिजली बनाना शामिल है. इस काम की कई लोगों ने सराहना की.

इतना ही नहीं, हम लोगों ने गोमूत्र से से बिजली बनाने में सफ़लता पाई है.

बिजली बनाने के बाद RDS ने ऑनलाइन सब्ज़ी बेचने का काम स्टार्ट किया. ये सीधे किसानों से सब्ज़ी लेते थे और डायरेक्ट कस्टमर्स तक पहुंचाते थे. हालांकि, आर्थिक कमी के कारण ये प्रोजेक्ट ज़्यादा दिन तक चल नहीं सका.

एजुकेशन एप्लिकेशन के ज़रिए भारत को पढ़ाना चाहते हैं

पढ़ाई को आम बच्चों तक पहुंचाने के लिए RDS ने शिक्षा के क्षेत्र में अलग-अलग एप्लिकेशन बनाए, जिसमें क्लास 6 से 12 तक के सभी विषयों के नोट्स हैं. इसके अलावा इन्होंने धर्म, स्वास्थ्य, खेल, समाचार और चैटिंग App भी बनाए हैं.

एंटी थेफ़्ट डिवाइस बहुत काम की चीज़ है

दुकानों से हो रहे लगातार चोरियों से निपटने के लिए RDS ने एंटी थेफ़्ट डिवाइस बनाई है, जिसे हम दुकान, घर और तिजोरी में रख कर अपने सामन को सुरक्षित रखा जा सकता है.

RDS इतना करके रूके नहीं. वे रोज नई-नई खोज कर रहे हैं. उनकी खोज देश को समर्पित है. उन्होंने थर्मल चार्जर भी बनाया है, हमारे शरीर के तापमान को ओब्ज़र्व कर बिजली बनाता है. इसका इस्तेमाल हम LED बल्ब जलाने में, मोबाइल फ़ोन को चार्ज करने के लिए कर सकते हैं. इन तीन युवाओं को हम सलाम करते हैं.