आज के आधुनिक युग में, जहां विज्ञान आकाशगंगाओं की खोज में, तारों के बीच गोते लगा रहा है, वहीं अभी भी हमारी धरती की कुछ ऐसी बातें हैं, जिन्हें समझना विज्ञान के भी परे है. भूत-प्रेत-पिशाच-शैतान-जिन्न में विश्वास करने पर लोग उसे अंधविश्वास मान कर नकार देते हैं. पर हर किसी के साथ कोई न कोई ऐसी घटना ज़रूर घटी होती है, जिसकी व्याख्या करना मुश्किल हो जाता है. वो क्या था? क्यों था? कहां से आया? क्या वो मेरा वहम था? क्या वो कोई साया था? ऐसे कई सवाल हमारे दिमाग में कौंध पड़ते हैं. 

Scoopwhoop हिंदी के लेखकों के साथ भी कुछ ऐसी घटनाएं घटी हैं, जो उन्होंने आज तक सिर्फ़ अपने ज़ेहन में छुपा कर रखी थीं.

आज हम आपको उनके साथ घटी रोंगटे खड़े कर देने वाली घटनाओं को लेकर आये हैं.

स्मिता- उस रात मैंने जिसे महसूस किया, वो मेरा भाई ही था

मैं भूत-प्रेत जैसी बातों पर आज भी यकीन नहीं करती, लेकिन पोस्ट-ग्रेजुएशन के दौरान मुझे उनके होने का आभास हुआ था. मेरे भाई की रोड एक्सीडेंट में डेथ हो गई. हम लोग कई रात तक सो नहीं पाए थे. जब वो था, तो मैं अकसर उसके साथ रात के एक-दो बजे कोल्ड ड्रिंक पिया करती थी और हम लोग बहुत हंगामा करते थे. थर्ड फ्लोर से ग्राउंड फ्लोर तक एक-दूसरे के पीछे भागते थे.

उसकी डेथ के पांचवें दिन जब मैं रात को 10 बजे उसकी कुछ फोटोज़ देख रही थी, तो अचानक फ्रिज के खुलने की आवाज़ आई. चूंकि हमारा फ्रिज जब ज़्यादा देर तक खुला रह जाता है, तो शोर करने लगता है, तो मेरा ध्यान उस तरफ गया. मैं भाग कर गई तो किचन में कोई नहीं था और दरवाज़ा भी बंद था. मुझे लगा कि दरवाज़ा बंद होने की आवाज़ क्यों नहीं आई, जबकि किचन के बगल वाले रूम में ही मैं थी. मैंने फ्रिज में रखी ThumsUp उठाई और दुबारा रूम में आ गयी. वापस आने के बाद मैं बिलकुल चौंक गई, क्योंकि उसकी वो फोटो जो मेरे फोन में थी और एक दिन मैंने ही क्लिक की थी, वो डिलीट हो गई थी. वो फोटो फिर नहीं मिली.

मैं रात भर बेचैन थी और सुबह जब आंख लगी तो मैंने सपना देखा कि वो मेरे पीछे भाग रहा है. जब मैं बेड से उठ कर भागती हुई नीचे आई तो सुबह के 4 बज रहे थे और ड्रॉइंग रूम के उस सोफे पर मुझे लगा कि वो बैठा हुआ है, जिस पर अकसर बैठने के लिए वो मुझसे लड़ाई किया करता था. मैं सांसें रोक कर सोफे के करीब गई तो वहां कुछ नहीं था. पर मैं जानती हूं कि मैंने खुली आंखों से सपना नहीं देखा था. वो मेरा भाई ही था, जो अभी भी अपनी पसंद वाले सोफे पर मुझसे पहले बैठ गया था. आज भी वो वाक़या समझ नहीं आता पर ये आभास जबसे हुआ, मुझे थोड़ा यकीन हुआ ऐसा कुछ तो होता है, जो हम शायद कभी-कभी महसूस कर पाते हैं.

आकांक्षा- मेरी आंखों के सामने दिखा Horror Bioscope

मुझे हमेशा से ये बात हैरान करती है कि भूत सिर्फ़ अंधेरे में ही दिखाई देते हैं. उजाला क्या उनका Stamina ख़त्म कर देता है? ख़ैर, मेरे साथ जो हुआ, वो उजाले में नहीं, हर बार की तरह अंधेरे में हुआ. मैं 3*6 के अपने तख़्त पर लेती हुई थी और सोने की कोशिश कर रही थी. फिर ज़ोर से आवाज़ हुई... भूत नहीं, किचन में चूहा था.

थोड़ी देर में मेरी आंखों के सामने (अंधेरे में) हवा में कुछ अजीब से Shapes दिखने लगे. ठीक वैसे ही जैसे लैपटॉप में Windows Media Player में अलग-अलग कलरफुल पैटर्न बनते हैं. बस ये काला था, जैसे हवा में कोई शेप बन रहा हो. मुझे लगा, मैं Hallucinate (पगला) कर रही हूं या फिर वीकनेस की वजह से शायद मेरा सर घूम रहा है. लेकिन मेरी सोच बिलकुल गलत थी.

वो आकृतियां इंसानों की नहीं थी... बस अलग-अलग शेप्स, जैसे बादलों के होते हैं. ये देखने के बाद मुझे पता नहीं क्यों इतना डर लगा कि मैंने आंखें ही बंद कर लीं. फिर शुरू हुआ असली ड्रामा:

ये ड्रामा मूक-बधिर फ़िल्मों की तरह ही था... न तो कोई आवाज़ थी, न ही चीख-पुकार, लेकिन फ़िल्म चल रही थी... मेरी आंखों के सामने अलग-अलग सीन आने लगे. पहले में, सफ़ेद कुर्ता पहने एक बच्चा… वो झूला झूल रहा है और उस झूले से गिर कर उसकी मौत हो जाती है. उसे वहीं पास में दफ़नाया जाता है.

कहानी ख़त्म

फिर एक बड़े से पहाड़ से जाती हुई रोड से एक दूल्हा कूद कर जान दे देता है और थोड़ी देर में उसका कंकाल वहां नाचने लगता है.

इसके बाद सब दिखना बंद, वो पैटर्न दिखना बंद. मैं थोड़ी देर उठी रही, ये सोच कर कि शायद कुछ दोबारा दिखे, लेकिन कहानी का The End हो चुका था. मेरा ये Horror Bioscope दर्शन सिर्फ़ एक दिन का नहीं था. रोज़ एक नई कहानी, रोज़ एक नई आत्मा.

बिक्रम- वो कौन है, मैं नहीं जानता, पर वो है ये सच है

बचपन में याद नहीं, लेकिन जब से मैंने होश संभाला है, तब से उसे महसूस करता हूं. धनबाद में रहते हुए मैंने उसे कई बार महसूस किया. दिल्ली आकर भी बहुत बार अकेले होने पर उसे करीब पाया. वो मेरे सिरहाने पर खड़ी होकर निहारती है मुझे. मेरी ये बात सुन कर शायद ही आपको इस पर यकीन होगा, लेकिन ये सच है और बड़ी कोशिशों के बाद लाइफ की इस बेहद रहस्यमयी घटना के बारे में आपको बता रहा हूं.

जब भी कभी अपने रूम में अकेला रहा, वो साये की तरह मेरा पीछा करती रही है. वो एक लड़की है और सफ़ेद लिबास में होती है. जब भी रात को मैं अकेला टीवी देखा करता हूं, तो उसके आने का एहसास होता है. उसके आने से पहले पूरे कमरे में बिलकुल अगरबत्ती की तरह.खुशबू बिखर जाती है, धड़कन तेज़ हो जाती है, तो मैं समझ जाता हूं कि वो आ चुकी है. मेरे बगल में बैठ कर मुझे देखते रहने के अलावा उसने कभी कुछ नहीं किया. कभी मुझे परेशान भी नहीं किया, लेकिन उसके आने से मैं बुरी तरह घबरा जाता हूं. कई बार मैं रात भर सो नहीं पाता. वो बहुत देर तक मुझे देखती रहती है और फिर चली जाती है.

लेकिन शायद उसने हमेशा मेरा ध्यान रखा है. कभी भी कुछ गलत करने जाता हूं, तो चाह कर भी नहीं कर पाता. ऐसा लगता है जैसे कोई ताक़त मुझे रोकने लगती है. मुझे नहीं पता कि मैं क्या कह रहा हूं, लेकिन ये मैंने कई बार महसूस किया है. मैं कई बार चिल्लाया हूं, परेशान रहा हूं. उसके बारे में लिखते हुए भी अजीब-सा लग रहा है. जैसे ये उसके आ जाने का डर हो. फिर भी मुझे बताना है कि वो जो कोई भी है, बस है और मैं इससे ज्यादा कुछ भी नहीं जानता.

जयंत- किराए के उस घर में हम दोनों के साथ कोई और भी था

शाम के करीब 7 बज रहे थे. घर पर बिजली नहीं थी. मुझे अपने चचेरे भाई के पास नोएडा जाना था. मैं और मेरा रूम पार्टनर दोनो चाय पीने अपनी 4 मंज़िला इमारत की सबसे ऊपरी मंज़िल से नीचे उतरे. तभी मुझे आभास हुआ कि मैं अपना पर्स ऊपर ही भूल गया हूं, जिसे लेने मैं वापस ऊपर आया. पर्स उठाया तो लगा जैसे कोई मेरे पीछे खड़ा है.

अभी एक दिन ही हुआ था उस घर में आए और बिजली न होने की वजह से अंधेरे का डर समझ मैं चुपचाप नीचे उतर आया. मैं नोएडा से रात करीब 10 बजे वापस आ गया और लाईट भी आ चुकी थी तब तक. मेरे दोस्त ने भी खाना खा लिया था और अब सोने की तैयारी हो रही थी. बिस्तर पर लेटने के बाद थोड़ी देर बातों की सिलसिला शुरू हुआ. अब रात के 2.45 हो रहे थे. मैंने कहा 'अब सोना चाहिए'. जवाब मिला 'हां'. कमरे की लाईट बंद की और लेट गए.

अंधेरा होने के 5 मिनट बाद ही ऐसा लगा मानो कोई कमरे में दौड़ रहा है. हम दोनों एक साथ उठे. कमरे की लाईट ऑन की, लेकिन वहां कोई नहीं था. वहम मान कर दोंनों ने फिर लाईट बंद की और लेट गए. फिर वही आवाज़ लेकिन पहले से ज़्यादा तेज़. इस बार हम दोनों उठे, लाईट ऑन करने की सोचते, तभी ऐसा लगा कि हम दोनों के कंधे पर किसी ने हाथ रखा. हम दोनों मुड़े, लेकिन वहां कोई नहीं था. हम ने एक दूसरे को देखा. डर हम दोनों के चेहरे पर साफ़ दिख रहा था. किसी तरह सोने की कोशिश करने लगे, लेकिन ऐसा लगा कोई हमारी छाती पर बैठा है और हिलने नहीं दे रहा.

करीब 5 मिनट की कोशिश के बाद हम दोनों उठे और छत पर भागे. सुबह हम दोनों ने वहीं बिताई. सुबह होते ही जब हमने इस बारे में पड़ोसी से पूछा तो पता चला यहां किसी लड़की की जल कर मौत हो गई थी और मकान मालिक ऐसी परेशानियों से बचने के लिए ये घर हमें किराए पर दे कर, खुद भी किराये के मकान में रहने चला गया था.

ये कोई कहानी नहीं मेरी आपबीती है. ये घर पूर्वी दिल्ली के पांडव नगर इलाके का है. घर का पूरा पता मुझे याद नहीं और उस डरावने एहसास के बाद मैं उसे याद करना भी नहीं चाहता. आज भी जब मैं और मेरा दोस्त उस रात को याद करते हैं तो, हमारे रौंगटे खड़े हो जाते हैं.

प्रत्युष- 3 साल तक मेरी बहन ने अन्न का एक दाना तक नहीं खाया था

कुछ 16 साल पहले की बात है, जब मेरी बहन मधु ने रात के खाने के बाद Vomiting कर दी. कुछ तबीयत खराब थी उसकी. मम्मी उसे डॉक्टर के पास ले गईं. हमें लगा शायद दवाई खाने के बाद उसे आराम मिल जाएगा. लेकिन तुरंत बाद उसे दोबारा उल्टी हुई. दूसरे दिन भी मधु ने जैसे ही नाश्ता किया, उसे फिर उल्टी हुई. हमने इसे बीमारी समझ कर डॉक्टर बदल दिया, पर फायदा कुछ नहीं हुआ.

मधु जैसे ही कुछ खाती, उसे Vomiting हो जाती. डॉक्टर ने बिमारी की जड़ जानने के लिए मधु का Ultra Sound भी किया. रिपोर्ट आने पर डॉक्टर भी कुछ न पा कर हैरान रह गया. ये महज़ बिमारी नहीं थी, कुछ और था. कुछ लोगों ने कहा ये ऊपरी साया है, किसी बाबा को दिखाओ. परिवार में ऐसा पहली बार हुआ था, तो शुरुआत में सबकी बात नज़र अंदाज़ करते हुए हमने डॉक्टर ही बदलने में समझदारी समझी. इस बात को अब कुछ महीने निकल चुके थे, लक्षण वैसे ही थे, फायदा कुछ नहीं.

तभी किसी ने इलाहाबाद के पास किसी बाबा का पता बताया, कहा कि उन्हें वहां से फायदा हुआ है, हम भी एक बार देख लें. कोई और रास्ता भी नहीं था. हमने इलाहाबाद की ओर रुख किया. कुछ महीने चक्कर लगाने के बाद जब कोई फायदा नहीं हुआ तो हमने वहां जाना छोड़ दिया. ​अब तक बीमारी के 6-7 महीने निकल चुके थे. हर रोज़ कुछ खाने के तुरंत बाद Vomiting का सिल​सिला जारी था. हैरानी की बात ये भी थी कि इस दौरान मधु को मोशन भी नहीं हुए थे. हमने उसके पेट में कुछ देर खाना रोकने के​ लिए एक तरीका खोजा. अब मधु अपने साथ दिन भर सौंफ का पैकेट रखती थी और कुछ खाने के बाद लगातार सौंफ चबाती रहती थी. मधु खाने के आलावा दिन भर सौंफ चबाती थी और रात में सोने से पहले Vomit कर देती थी. तभी हमारी एक रिश्तेदार ने एक गुरूद्वारे के बारे में बताया, जहां हर रविवार कीर्तन होता है और बाबा जी की चौकी लगती है. गुरूद्वारे में बैठने वाले बाबा जी पर सवारी आती है, जो लोगों के अधिकतर सवालों के जवाब और उसके समाधान बता देती है. हमने वहां दिखाया तो हमें पता चला कि उस पर कई सालों से ऊपरी साया है.

उस गुरूद्वारे में मधु जैसे कई लोग आते थे, जो किसी न किसी Supernatural Power से परेशान थे. मां, मधु को लेकर हर रविवार वहां जाने लगीं. ​मधु को वहां बैठने में अजीब सी घुटन होती थी, जिसके लिए वो कहती थी कि कोई उसका गला घोंट रहा है. वहां न जाने के लिए मधु अलग-अलग बहाने बनाने लगी. धीरे-धीरे उसके लक्षण और खराब हो गए. अब जब-जब गुरूद्वारे जाने की बात होती, उसका अजीब सा गुस्सा देखने को मिलता था. अजीब सी डरावनी आवाज़ में वो सब पर चिल्लाती थी कि, 'तुम लोग मुझे मार दोगे'.

जल्द ही बाबा जी ने समाधान बताया. बाबा जी मधु को डेरे साहब के पांच स्नान बताए. डेरे साहब, जलंधर से कुछ दूरी पर धौलीधार नाम की एक जगह पर है. हर साल होली पर गुरूद्वारे की पूरी संगत भी यहां स्नान करने जाती है. पहले साल मां और मधु गुरूद्वारे की संगत के साथ यहां गए तो कुछ समय के लिए मधु को फायदा हुआ. पर कुछ समय बाद वो फिर वैसी ही हो गई. बाबा जी ने 5 स्नान की बात कही थी. उस फायदे से मां का विश्वास और मज़बूत हो गया और मधु को हमने 2 साल में 4 बार वहां का स्नान करवाया. साल 2003 की होली में मधु का आखिरी स्नान बाकी था, कि उसके 2 महीने पहले हमारे एक करीबी रिश्तेदार की डेथ हो गई. उसी समय 10वीं के दिन मधु ने मां से बोला कि मुझे Vomiting महसूस नहीं हो रही. उसके मुताबिक वो एकदम ठीक महसूस कर रही थी. पर ऐसा शायद पांचवें स्नान से बचने के लिए था.

मधु ने सबसे कहा ​की 'मैं बिलकुल ठीक हूं और मुझे डेरे साहब नहीं जाना'. इसके बावजूद भी जब वहां जाने की पूरी तैयारी होने लगी तो मधु का अजीब गुस्सा निकलने लगा. ये मधु नहीं थी, 3 साल से जिसके शरीर में अन्न का एक दाना न रुका हो, उसमें उठा-पटक करने की ताकत नहीं हो सकती. मां ने मधु की एक न सुनि और संगत के साथ उसे पांचवे स्नान के लिए डेरे साहेब ले गईं. आज बाबा जी की कृपा से मधु ठीक है.

इस प्रस्तुति के लिए Mindblowing Illustrations बनाए हैं अनीश कुमार डाउलागुफ़ु ने. आप उनके काम को यहां क्लिक कर के सराह सकते हैं.

अगर आपके साथ भी ऐसी कोई घटना घटी है, तो हमारे साथ शेयर कर सकते हैं.