सोशल मीडिया को देखकर बचपन में सुनी उस गड़रिये की कहानी अकसर याद आ जाती है. गड़रिया शेर-शेर चिल्लाकर लोगों को बेवकूफ़ बनाता था, जबकि कोई शेर उस पर हमला नहीं करता था. गांववाले उसे बचाने आते, तो वो हंसता. फिर एक दिन जब उस पर सच में एक शेर ने हमला कर दिया तो कोई भी उसे बचाने नहीं आया.

सोशल मीडिया का हाल भी कुछ ऐसा ही है. जितनी सच्ची ख़बरें नहीं फैलायी जाती, उससे ज़्यादा तो ग़लत और झूठी ख़बरें फैलायी जाती है. ये एक ऐसा मंच बन गया है जहां हम बिना जांचे-परखे किसी पर भी आरोप लगाने से नहीं चूकते.

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1-2 दिन से ये फ़ोटो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. इस तस्वीर को जिन्होंने फ़ेसबुक पर साझा किया है उन्होंने इसके Caption में लिखा है कि ये तस्वीर Sociology(समाज शास्त्र) के Study Material की है. शान्ति नगर, बेंगलुरू के St.Joseph College ने B.A. के छात्रों के लिए ये Study Material जारी किया है. तस्वीर साझा करने वाले शख़्स का ये भी कहना है कि किसी भी छात्र या शिक्षक ने इसका विरोध नहीं किया.

लाल रंग से Underline किये हुये 'Advantages of Dowry' यानि की दहेज लेने के लाभ को देखकर सबका ख़ून खौल रहा है. ये स्वभाविक भी है.

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लोग भारत की शिक्षा व्यवस्था पर अपना गुस्सा ज़ाहिर कर रहे हैं.

हमने इस तस्वीर को पढ़ा. तस्वीर के सबसे ऊपर छोटे अक्षरों में लिखा हुआ है 'Dowry Menace' जिसका मतलब है 'दहेज से ख़तरा', देखने पर ये चैप्टर का नाम लग रहा है. उसके नीचे ही 1-2 वाक्य के बाद लिखा हुआ कि दहेज देने के पक्षधर का ऐसा मानना है. मतलब कि लेख के शुरुआत में ही ये लिखा गया है कि दहेज प्रथा को लोग सही ठहराते हैं और इसके नीचे वो कारण लिखे गए हैं जिनका हवाला देकर इस प्रथा को सही ठहराया जाता है. जब शुरू में ही ये कह दिया गया कि दहेज प्रथा के समर्थकों का ऐसा मानना है, तो शिक्षार्थियों और शिक्षकों के विरोध का प्रश्न ही नहीं उठता, जो सवाल तस्वीर साझा करने वाले ने उठाया है.

फ़ोटो पर कमेंट करने वाले कुछ लोगों का ये भी कहना है कि ये नोट्स किसी बेवकूफ़ और कम-पढ़े लिखे ने बनाया है, जिसकी पूरी संभावना है. वैसे भी हमारे देश में उच्च शिक्षा के स्तर की हक़ीक़त किसी से छिपी नहीं है. लेकिन हमें ये नहीं लगता कि ये लेख किसी भी तरह से दहेज को सही ठहरा रहा है.

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कुछ लोगों ने शायद इसे पढ़कर देखा है, उनका भी ये मानना है कि यहां दहेज को सही नहीं बताया जा रहा.

उम्दा अंग्रेज़ी में न लिखा गया ये लेख लोगों को भ्रमित कर रहा है.

ऐसी कई तस्वीरें और वीडियो हैं जो सोशल मीडिया पर ग़लत Caption के साथ साझा किए जाते हैं. लोग सच जाने बिना ही कोई भी वीडियो कई लोगों के साथ शेयर भी कर देते हैं. इसी से तो नफ़रत फैलती है. किसी भी बात पर React करने से पहले उस पर विचार कर लेना ज़रूरी है.