भारतवर्ष में मनाए जाने वाले सभी त्योहारों में दीपावली का सामाजिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यधिक महत्त्व है. वैसे तो हर पर्व-त्योहार के पीछे कुछ धार्मिक पौराणिक और मान्यताएं होती हैं. ठीक उसी तरह दीपावली की बात करें, तो भी हमें इसे मनाने के पीछे एक नहीं, बल्कि कई कथाएं और मान्यताएं मिलेंगी.

लेकिन बचपन से ही हम दिवाली मनाने का सिर्फ़ एक ही कारण जानते आए हैं. हम सभी को दादी-नानी की कहानियों या फिर किसी तरह से यही बताया गया है कि जब रावण का वध करके 14 साल के वनवास के बाद भगवान राम पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या वापस आए थे, तो इस दिन नगरवासियों ने पूरे नगर में दीप जलाकर उनका स्वागत किया था. तभी से दिवाली का त्योहार मनाया जाता है.

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लेकिन आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि ऐसे कई और भी कारण हैं, जिनकी वजह से दिवाली मनाई जाती है. तो चलिए आज हम आपको कथाओं के अनुसार दिवाली मनाने के 9 और भी कारण बताते हैं.

1. धन की देवी लक्ष्मी जी का जन्मदिन

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शास्त्रों के अनुसार, ऐसा माना जाता है कि इस दिन देवी लक्ष्मी जी का जन्म हुआ था. इसलिए इस दिन दिवाली मनाई जाती है.

2. भगवान विष्णु का वामन अवतार

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ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण कर लक्ष्मी जी को राजा बली की कैद से छुड़ाया था. इसलिए दिवाली मनाने के पीछे यह भी एक कारण है.

3. भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध किया

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पुराण के मुताबिक, नरकासुर ने 16,000 महिलाओं को बंदी बना रखा था. इसलिए भगवान कृष्ण ने अत्याचारी नरकासुर का वध दीपावली के एक दिन पहले चतुर्दशी को किया था. इसी खुशी में अगले दिन अमावस्या को गोकुलवासियों ने दीप जलाकर खुशियां मनाई थीं.

4. पांडवों का वनवास से आगमन

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कार्तिक अमावस्या के दिन पांडव 12 साल के अज्ञातवास के बाद वापस आए थे. प्रजा ने इस दिन दीप जलाकर उनका स्वागत किया था.

5. समुद्रमंथन से लक्ष्मी जी व कुबेर का प्रकट होना

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एक पौराणिक मान्यता है कि दीपावली के दिन ही माता लक्ष्मी दूध के सागर, जिसे केसर सागर के नाम से जाना जाता है, से उत्पन्न हुई थीं. माता ने सम्पूर्ण जगत के प्राणियों को सुख-समृद्धि का वरदान दिया और उनका उत्थान किया.

6. विक्रम संवत के प्रवर्तक चक्रवर्ती राजा विक्रमादित्य का राजतिलक

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इतिहासकारों के मुताबिक, इस दिन विक्रम संवत के प्रवर्तक चक्रवर्ती हिंदू धर्म के महान राजा विक्रमादित्य का राजतिलक हुआ था. इसलिए भी दिवाली एक ऐतिहासिक त्योहार है.

7. जैन गुरु महावीर का निर्वान

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दीपावली जैन समुदाय के लिए भी खास है. ऐसा माना जाता है कि इस दिन जैन गुरु महावीर ने निर्वान की प्राप्ति की थी. इसलिए जैन समुदाय भी दिवाली मनाता है.

8. सिखों के छठे गुरू हरगोविंद साहब हुए थे रिहा

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सिखों के लिए भी दीवाली महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इसी दिन ही अमृतसर में 1577 में स्वर्ण मन्दिर का शिलान्यास हुआ था. इसके अलावा 1618 में दीवाली के दिन सिख के छठे गुरु हरगोविन्द सिंह जी को बादशाह जहांगीर की कैद से जेल से रिहा किया गया था.

9. महाकाली की पूजा

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राक्षसों का वध करने के बाद भी जब महाकाली का क्रोध कम नहीं हुआ, तब भगवान शिव स्वयं उनके चरणों में लेट गए. भगवान शिव के शरीर स्पर्श मात्र से ही देवी महाकाली का क्रोध समाप्त हो गया. इसी की याद में उनके शांत रूप लक्ष्मी जी की पूजा की शुरुआत हुई. इसी रात इनके रौद्ररूप काली की पूजा का भी विधान है.

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