संगीत एक ऐसी भाषा है जिसे मूक भी आसानी से समझ सकते हैं. साज़ और संगीत न सरहदों की मुरीद होती है और न ही भाषाई अंतरों की.

प्रेम की भाषा है संगीत. संगीत में वो रूहानियत है कि दुश्मन भी अपने बन जाते हैं. तभी तो हिन्दू मान्यता में संगीत को भी पूजनीय माना गया है. मशहूर संगीतकार बॉब मार्ले ने कहा था, 'संगीत की सबसे ख़ूबसूरत बात ये है कि इसकी चोट में भी सुकून होता है.' मतलब दर्द में सुकून मिलता है.

मेट्रो, बस, सड़कों पर तो आजकल हमें कई Earphone-धारी लोग नज़र आ जाते हैं. लेकिन एक ज़माना ग्रामोफ़ोन, रेडियो और टेप-कैसेट्स का भी था. लोग एक जगह इकट्ठा होकर साथ मिलकर संगीत का आनंद लेते थे. कहीं-कहीं तो गांव में एक रेडियो पर ही सारे लागों का मनोरंजन हो जाता था. और जहां ये साधन भी नहीं होते थे, वहां लोग खुद ही सुर-ताल पर बोल बिठा लेते थे और बना लेते थे गीत.

हमारी भाषा कोई भी क्यों ना हो, लेकिन गीत किसी भी भाषा के हों, दिल में जगह बना ही लेते हैं. तभी तो Despacito स्पेनिश गाना होते हुए भी इतना मशहूर है, या फिर भोजपुरी गाना लॉलीपॉप लागेलु लगभग हर शादी में बजता ही है. या फिर दलेर मेंहदी के पंजाबी गाने, जो आज भी हर पार्टी की रौनक बढ़ा देते हैं.

क्षेत्रीय भाषा के कुछ ऐसे ही गाने लेकर आये हैं, जिनमें फ़ील बॉलीवुड के गानों से कम नहीं:

1. पीर म्यानो गीर दिल गोम, कश्मीरी सूफ़ी गीत, स्नीति मिश्रा

बूमरो-बूमरो गाने के कुछ लफ़्ज़ मिशन कश्मीर फ़िल्म से बहुत लोकप्रिय हुआ. लेकिन धरती के स्वर्ग कशमीर के ऐसे बहुत से गीत हैं, जो किसी भी संगीत प्रेमी को बहुत पसंद आएंगे.

पीर म्यानो का ये वर्ज़न स्नीति मिश्रा ने गाया है. इस गीत में शागिर्द अपने पीर से दरख़्वास्त कर रहा है कि जो भी नकारात्मकता उसे घेरे है, उसे वो दूर करें.

2. Lallewan Lallewan, कश्मीरी गीत, यावर अबदल

कश्मीरी सूफ़ी कवि सोचे क्राल ने लिखा था ये गीत. Lallewan का मतलब है झूलाना. बच्चों को सुलाने के लिए ये गीत सुनाया जाता है. यावर अबदल ने इस गीत को अपनी आवाज़ से बखूबी तराशा है.

3. बेड़ू पाको बारमासा, गढ़वाली-कुमाऊनी गीत

बेड़ू पाको बारमासा, नरेणा कफ़ल पाको चैता, मेरी छैला... स्कूल में ये गाना सुना होगा. अगर नहीं तो, अब सुन लीजिये. पहाड़ी कहीं भी हों, ये गीत उन्हें हमेशा घर की याद दिलाती है. ये किसने लिखा था ये तो पता नहीं, पर गीत है लाजवाब.

4. चैता की चैत्वाली, गढ़वाली जागर, चंद्र सिंह राही

गढ़वाल क्षेत्र के कई गांवों में डौंर-थकुली बजाकर 3-4 सालों में एक बार जागर का आयोजन किया जाता है. जागर यानि कि जागरण. जागर, मंदिर या घर कहीं भी आयोजित किया जाता है. इसमें ग्राम देवता को जगाया जाता है.

इसी गीत को अमित सागर ने दोबारा Recreate किया है-

5. फुलारी, गढ़वाली-कुमाऊनी, कवींद्र सिंह नेगी

कवीन्द्र सिंह नेगी ने ये प्यारा सा गीत लिखा है. फुलारी यानि की फूल चुनने वाले बच्चे. बच्चों के लिए ही ये गीत. जितनी प्यारी कवींद्र की आवाज़ है, वो किसी भी परदेसी को अपने घर की याद दिला ही देगा.

6. काली घघरी, हिमाचली गीत, लमन बैंड

लमन बैंड ने कई हिमाचली गानों को Revive किया है. ये गीत पति-पत्नी के बीच संवाद है. बोल जितने प्यारे हैं, म्यूज़िक भी उतना ही दिल छू लेने वाला है.

7. माये नी मेरीये, हिमाचली लोक गीत, मोहित चौहान

इस गीत में एक बेटी अपनी मां से पूछ रही है कि चम्बा कितना दूर है. हिमाचली भाषा आपको पंजाबी से मिलती-जुलती लगेगी. इस गीत को मोहित चौहान के अलावा भी बहुत से गायकों ने गाया है.

8. जुग-जुग जियसु ललनवा- सोहर, भोजपुरी

जुग-जुग जियसु ललनवा-भवना के भाग जागल हो... बच्चे के पैदा होने पर ये गीत गाया जाता है. भोजपुरी के कई मशहूर गानों में से एक, इस गाने में बच्चे के अच्छे भविष्य की कामना की गई है.

9. पहिले- पहल हम कइलीं- छठ गीत, भोजपुरी, शारदा सिंह

जिन्हें भोजपुरी नहीं आती, उन्हें भी शारदा सिन्हा की आवाज़ बांध के रखती है. शारदा सिन्हा ने न सिर्फ़ भोजपुरी बल्कि मैथिली और मगही में भी अनेक लोक गीत गाए हैं.

10. सैराट ज़ाला जी, मराठी

ये फ़िल्म जितनी उम्दा है, इसके गाने भी उतने ही बेहतरीन. इस फ़िल्म को देखने वालों की जुबां पर कई दिनों तक इसी के गाने थे. मराठी ना जानने के बावजूद इस फ़िल्म के गाने आपके चेहरे पर मुस्कुराहट ले आते हैं.

11. केसरिया बालम, राजस्थानी गीत, अल्लाह जिलाई बाई

ये मशहूर राजस्थानी गीत अल्लाह जिलाई बाई की देन है. इस गीत को आपने कई बार सुना ही होगा. अब इसे अपने Playlist में भी Add कर लीजिये.

12. चढ़-चढ़ जाना, राजस्थानी गीत, भंवरी देवी

राजस्थान के भोपा समुदाय ने सदियों से पबुजी राठौड़ की कहानियों को गीतों के माध्यम से संजो कर रखा है. पबुजी को लक्ष्मण का ही रूप माना जाता है. भंवरी देवी ने Coke Studio के लिए ये गीत गाया था. ये गीत सुनकर अपने आप ही हाथ ताल देने लगते हैं.

13. टोकारी गीत, असम

टोकारी गीत असम की देन है. गीतों के दौरान टोकारी या दुकारी बजाया जाता है इसलिये इन गीतों को टोकारी कहा जाता है. महाभारत-रामायण की कहानियों पर ही ये गीत लिखे जाते थे. गायक Papon ने भी Coke Studio में ये गीत गाया था. काफ़ी मज़ेदार गाना है ये, झूमने पर मजबूर कर देता है.

14. ढोलीड़ा ढोल रे वगाड़ मारे हिंच लेवी छे, गुजराती गरबा

गुजराती गरबा गीत के बिना तो ये पूरी सूची अधूरी रह जाती. नवरात्रि के वक़्त ही क्यों, साल के बाकी समय भी आप इस गज़ब के गीत का आनंद ले सकते हैं.

15. आमारो पोरानो जाहा चाए, रवींद्र संगीत

गीत-संगीत की बात हो और बंगाल ना आये, ऐसा कैसे हो सकता है. 'आमि जे तोमार' के अलावा भी बहुत से गीत हैं, जिनका संगीत आपको बांधकर रखेगा. बहुत से गायकों ने ये गीत गाया है. इस गीत में प्रेमी अपने इश्क़ के बारे में बता रहा है. एक बहुत ही रोमेंटिक गाना है, ज़रूर सुनियेगा.

16. मधानियां, पंजाबी गीत

पंजाब की कोयल कही जाने वाली सुरिंदर कौर को श्रेय जाता है इस गीत को हमारे बीच लाने का. ये तो मालूम नहीं की इस गीत को किसने लिखा था. लेकिन सुरिंदर ने इसे अपनी आवाज़ से तराशा. ये गीत एक विदाई गीत है. इसके अलावा उन्होंने अक्ख काशनी, लट्ठे दी चादर जैसे गानों को भी प्रसिद्ध किया. ये सारे गीत किसी भी शादी में ज़रूर बजते हैं.

नेहा भसीन ने भी इन गीतों को गाया है.

17. Pallivaalu Bhadravattakam, मलायलम गीत, केरल

ये गीत देवी काली को समर्पित है. ये बहुत पुराना गीत है, जिसे अलग-अलग गायकों ने गाया है. पल्लिवालु मतलब तलवार और भद्रवटकम मतलब पायल. गर्मियों में फसल की कटाई होने के बाद ये गीत मंदिरों में गाया जाता है.

18. रांगाबाती, उड़िया गीत

उड़िया गीत होते हुए भी ये गीत पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड के भी कुछ क्षेत्रों में भी गाया जाता है. Coke Studio में इस गाने को Recreate किया गया.

थैंक्स ना कहना, ये तो हमारा फ़र्ज़ था. Long Live Music!