विकास के नाम पर सरकारें बन भी जाती हैं और गिर भी जाती हैं. उसी 'विकास' का ज़मीनी हाल रोज़ नए-नए रूप में सामने आ रहा है. कभी एंबुलेंस न होने से अपने बीमार बच्चे को लेकर किसी को मीलों पैदल चलना पड़ता है तो किसी को पत्नी का शव कंधे पर लेकर लौ़टना पड़ता है.

इस बार मामला ओडिशा में एक गर्भवती महिला को कंधे पर नदी पार कराने का है. रायगढ़ ज़िले के कल्याणसिंहपुर ब्लॉक के एक गांव में ये मामला सामने आया है.

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गौरतलब है कि गांव में रहने वाली 30 साल की अंकु मिनियाका को सोमवार को लेबर पेन हुआ था. अंकु के एक रिश्तेदार ने आरोप लगाया है कि उन्होंने एंबुलेंस के लिए अस्पताल फ़ोन किया था लेकिन एंबुलेंस उपलब्ध नहीं थी.

कोई भी विकल्प सामने न देख महिला के रिश्तेदारों ने गर्भवती महिला को खुद ही स्ट्रेचर पर ले जाने का फ़ैसला किया. स्ट्रेचर को कंधे पे लेकर वो करीब 2 किलोमीटर तक चले. कंधे पर ही उसे बीच में पड़ने वाली नागवली नदी पार कराई गई, जिसमें कमर तक पानी था.

नदी पार करने के बाद राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की एक मोबाइल एंबुलेंस मिली, जिससे अंकु को कल्याणसिंहपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया. शाम को महिला ने बच्चे को जन्म दिया. अब मां और बच्चे दोनों की हालत स्थिर है.

मंगलवार को ओडिशा सरकार ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री पी.के.जेना ने कहा कि हमने स्वास्थ्य अधिकारियों और ज़िलाधिकारी को जांच के आदेश दिए हैं और रिपोर्ट जमा करने के लिए कहा है. जांच में जो भी पाया जाएगा उसके हिसाब से कार्यवाई की जाएगी.

ओडिशा के ही दाना मांझी को अपनी पत्नी के शव को कंधे पर लेकर कई किलोमीटर तक चलने की तस्वीर अभी लोग भूले नहीं है. पिछले कुछ महीनों में देश के कई हिस्सों में ऐसी घटनाएं बढ़ी हैं. लेकिन सरकार ने इन मामलों में अभी तक सख़्त रवैया नहीं अपनाया है.

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