गुरुग्राम स्थित रेयान इंटरनेशनल स्कूल में 8 सितंबर को 8 साल के प्रद्युमन ठाकुर की हत्या कर दी गई. स्कूल के ही एक बस के कंडक्टर, अशोक कुमार ने अगले रोज़ अपना जुर्म भी कुब़ूल लिया. देशभर में हत्यारे को लटकाने, गोली मारने, कटवाने की बातें भी हो गयीं. माता-पिता और अभिवावकों का हिंसक प्रदर्शन भी हुआ, जिसका जवाब पुलिस ने लाठीचार्ज से दिया.

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अपराधी ने कुबूला कि वो प्रद्युमन को Sexually Assault करना चाहता था, प्रद्युमन का विरोध ही उसकी मौत की वजह बन गया.

पिछले 2-3 दिनों में बहुत कुछ देखने को मिला. बाल यौन शोषण को इतने में हल्के में लेना ठीक नहीं और न ही स्कूल सिक्योरिटी को. स्कूल पर क़ानूनी कार्रवाई होगी या नहीं पता नहीं, पर इतना पता है कि हर दिन न जाने कितने अशोक कुमार, प्रद्युमन जैसे मासूमों को अपना निशाना बनाते हैं. प्रद्युमन ने अपने साथ हो रहे ग़लत के खिलाफ़ आवाज़ उठाई, जिसका ख़ामियाज़ा उसे अपनी जान दे कर भुगतना पड़ा.

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इन सब के बीच अभिनेत्री रेणुका शहाणे ने फ़ेसबुक पर अपनी चिंताएं और आशंकाएं जताई. ये फ़ेसबुक पोस्ट सभी के लिए पढ़ना ज़रूरी है:

'रेयान इंटरनेशनल स्कूल में हुए 7 साल के मासूम की हत्या और एक दूसरे स्कूल में 3 साल की बच्ची के साथ बलात्कार ने मुझे पूरी तरह से झकझोर दिया है. हम अपने बच्चों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करें? माता-पिता बच्चों को इसी भरोसे के साथ स्कूल छोड़ते हैं कि विद्या के मंदिर की चारदीवारी के अंदर वे सुरक्षित होंगे. लेकिन एक के बाद एक हो रही ये घटनाएं इस बात का सुबूत हैं कि ये इंटरनेशनल स्कूल मोटी फ़ीस वसूलना जानते हैं, बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना नहीं जानते.
गुरुग्राम में हुई घटना स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था के कई कमज़ोर पहलुओं को उजागर करती हैं:
1. जो वॉशरूम बच्चे इस्तेमाल करते थे, वही वॉशरूम बस ड्राईवर और कंडक्टर इस्तेमाल करते थे.
2. स्कूल के अंदर आरोपी आराम से चाकू लेकर घुस गया.
3. वॉशरूम के बाहर कोई महिला कर्मचारी नहीं थी.
4. उस बच्चे की चीखें भी किसी को सुनाई नहीं दी.
5. स्कूल मैनेजमेंट ने मामले को रफ़ा-दफ़ा करने की कोशिश की.
6. स्कूल की दीवार भी टूटी हुई थी, सुरक्षा व्यवस्था की ये बहुत बड़ी चूक है.
सुरक्षा में इतनी ढील देख कर ये सवाल उठता है कि स्कूल के Trustees, मैनेजमेंट, प्रिंसिपल स्कूल चलाने लायक भी हैं या नहीं!
आज मैंने पढ़ा कि इस घटना का आरोपी स्कूल से कुछ ही दूरी पर स्थित एक दूसरे स्कूल में ड्राईवर था. अभिभावकों और छात्रों की शिकायत पर उसे निकाल दिया गया था, वो छात्रों के साथ ग़लत हरकतें करता था. लेकिन स्कूल ने पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं की. इसी से आरोपी के हौसले बुलंद हुए होंगे.
शिकायत न करने की वजह से ही ऐसे लोगों की हिम्मत बढ़ जाती है और मासूम बच्चे ख़तरे में पड़ जाते हैं.
हम सभी माता-पिता को एकजुट होकर अपराधियों की एक लिस्ट की मांग करनी चाहिए जिन्होंने बच्चों के साथ कभी भी ऐसी हरकतें की हों. ये सूची सरकारी और प्राइवेट दोनों ही स्कूलों में भेजी जानी चाहिए. ताकि कोई भी बस ड्राईवर, कंडक्टर, चपरासी, कोच, टिचर, प्रिंसपल, Trustee, जिसके नाम पर कभी भी कोई बाल यौन शोषण की शिकायत हुई हो, दोबारा किसी मासूम को अपना निशाना ना बना पाए.
इस सूची को एचआरडी और शिक्षा विभागों की वेबसाइट पर भी डालना ज़रूरी है ताकि कोई भी इसे आसानी से हासिल कर सके.
हमें यौन शोषण कर आसानी से बच जाने वालों के खिलाफ़ सख़्त कार्रवाई करनी होगी.
इस स्कूल के Trustees ने बच्चों की ज़िन्दगी से खिलवाड़ किया है.
स्कूल के प्रिंसिपल को निकाल दिया गया पर चेयरपर्सन और Trustees का क्या? जब तक इनके खिलाफ़ कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की जाएगी, तब तक दूसरे स्कूल इस मामले को गंभीरता से नहीं लेंगे.
मैं सभी स्कूलों से अपील करती हूं कि किसी को भी नौकरी पर रखने से पहले उसके बारे में अच्छे से जांच कर लें. यौन शोषण किसी भी बच्चे की ज़िन्दगी में एक बुरी याद बनकर रह जाता है, बच्चे बड़े हो जाते हैं पर उस बुरी याद को भूल नहीं पाते. गुरुग्राम में उस बच्चे की बेरहम हत्या भी उसके माता-पिता को उम्रभर का ग़म और दर्द का कारण बन गई.
गोरखपुर के बाद अब नासिक में सुविधाओं के अभाव में महीने भर में 55 बच्चों की मौत हो गई.
कभी-कभी लगता है कि अब हम इंसानों को भी बर्बाद हो जाना चाहिए.'

रेणुका के मन में जो सवाल हैं वो आज देश के हर माता-पिता के मन में है.