एक ज़माना था जब कालजयी लेखक दाने-दाने के मोहताज थे. समाज की सच्चाई बताने वाले लेखकों की हालत दयनीय थी. आज जिन प्रेमचंद की किताबें पूरी दुनिया पढ़ती है उन्होंने ग़रीबी में ही अपनी ज़िन्दगी गुज़ारी.

मन्टो, इस्मत आपा को तो कोर्ट के कई चक्कर लगाने पड़े. कसूर सिर्फ़ एक 'अफ़सानों को जस का तस कागज़ पर उतारना.'

ज़माना बदल चुका है. लेखनी भी बदल चुकी है. मन्टो, प्रेमचंद, सुमित्रानंदन पंत की जगह दूसरे लेखकों ने ले ली है. पाठकों को भी 100-150 रुपए वाली कॉलेज/स्कूल लव/सेक्स/करियर से जुड़ी कहानियां भाने लगी हैं. अच्छा या बुरा, इस पर हम कमेंट नहीं करेंगे.

बदलते वक़्त के साथ लेखकों के हालात भी बदले हैं. पहले के मुक़ाबले लेखकों के हालात सुधरे हैं. एक और चीज़ भी बदली है, पहले लेखकों सिर्फ़ अपना पब्लिशर ढूंढना पड़ता था. किताब को पाठकों तक पहुंचाने की ज़िम्मेदारी डिस्ट्रिब्यूटर और पब्लिशिंग हाउस की थी. अब लेखकों को अपनी भी पब्लिसिटी करनी पड़ती थी. चेतन भगत और Ola के इस Collaboration से तो कुछ ऐसा ही लगता है.

चेतन भगत की किताब आ रही है 'The Girl in Room 105'. किताब के प्रमोशन के लिए Ola Cabs के साथ चेतन ने #RideWithChetan कैंपेन शुरू किया है. 25 सितंबर तक चेतन के साथ कैब में सफ़र करने का मौक़ा है.

इससे पहले 3 सितंबर को चेतन ने इस किताब का ट्रेलर भी जारी किया था.

Ola Cabs के साथ इस तरह के कैंपेन को सोशल मीडिया के सैनिकों ने स्वीकार नहीं किया और चेतन संग Ola Cabs को भी ट्रोल कर दिया.

चेतन भगत ने 'Five Point Someone' किताब से भारतीय युवाओं के जीवन में तहलका मचा दिया था. चेतन की ये किताब कैसी थी पता नहीं, हमने पढ़ी नहीं है, लेकिन इतना याद है कि उस समय स्कूल के बच्चे तक इस किताब को लेकर पगला गए थे. बीतते वक़्त के साथ चेतन की किताबों की रिडरशिप कमी नहीं है, क्योंकि आज भी मेट्रो, बस, ट्रेन में उनकी किताबों के साथ युवा दिख जाते हैं. लेकिन बहुत से लोगों को ये बात समझ नहीं आती कि उन्हें सफ़लता क्यों मिली?