रवांडा की सरकार ने अपने अधिकारियों को देश के कोने-कोने में भेज कर उन सभी कॉस्मेटिक प्रोडक्ट को ज़ब्त करने का आदेश दिया है, जो उपभोक्ता को गोरा या स्किन का रंग साफ़ करने का दावा करते हैं.

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पूर्वी अफ़्रीका में स्थित इस देश ने स्किन ब्लीच करने वाले सभी कॉस्मेटिक प्रोडक्ट के ख़िलाफ़ अभियान छेड़ दिया है. वो सभी कॉस्मेटिक प्रोडक्ट जिनमें Hydroquinone पाया जाता है, वो बैन कर दिए गए हैं.

रवांडा के जन संपर्क और संचार अधिकारी Simeon Kwizera ने CNN को बताया कि ये बैन रवांडा स्वास्थ मंत्रालय और फ़ूड एंड ड्रग अथॉरिटी द्वारा लगाए गए हैं.

Simeon ने आगे बताया कि प्रोडक्ट को ज़ब्त करने का ऑपरेशन तक़नीकी जानकारों द्वारा किया जा रहा है और सुरक्षा को ध्यान में रखकर पुलिस की मौजूदगी भी सुनिश्चित की जा रही है.

रवांडा के राष्ट्रपति Paul Kagame ने पिछले साल नवंबर महीने में ट्विटर पर ऐसे प्रोडक्ट्स को बैन करने की ज़रूरत के ऊपर बहस की शुरुआत कर दी थी. रवांडा में इन प्रोडक्ट को 'Whitener' कहा जाता है.

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स्किन ब्लिचिंग क्रीम के ऊपर किए गए एक महिला की पोस्ट पर राष्ट्रपति ने जवाब देते हुए कहा कि ये क्रिम स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती हैं. इसके बाद देश के स्वास्थय मंत्रालय ने तीव्र गति से इसके ऊपर कार्यवाई की.

स्वास्थ विभाग में कैंसर यूनिट के डायरेक्टर Francois ने Reuters News Agency को कहा, 'हम लोग जनता को शिक्षित करने में ज़ोर लगा रहे हैं और ज़मीन पर जा कर ऐसे प्रोडक्ट के ज़ब्त कर रहे हैं.'

स्थानीय मीडिया के अनुसार, रवांडा की पुलिस ने 5 हज़ार बैन किये गए ब्लिचिंग प्रोडक्ट्स को ज़ब्त किया है, ये प्रोडक्ट लोशन, तेल, साबुन और स्प्रे के रूप में थे.

जनता और सरकार के विरोध के बावजूद अफ़्रीका के कई देशों में त्वचा को साफ़ करने वाली क्रीम धड़ल्ले से बिक रही हैं. अफ़्रीका की मशहूर टीवी स्टार Blac Chyna ने जब ये घोषणा की कि वो Whitenicious नाम की ब्यूटी लाइन के साथ साझेदारी कर Lagos शहर में फ़ेस क्रीम लॉन्च करने वाली हैं, तब उनको लोगों का विरोध झेलना पड़ा था.

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के अनुसार, ऐसे प्रोडक्ट्स में Mercury और Hydroquinone पाए जाते हैं, जिनसे कई प्रकार के कैंसर के होने की आशंका बढ़ जाती है.

Global Industry Analysts का अनुमान है कि दुनिया भर में गोरा करने वाली क्रीम का बाज़ार साल 2024 तक 31.2 बिलियन डॉलर का हो जाएगा, वर्तमान में इसका आकार 17.9 बिलियन डॉलर का है. इनकी आय का मुख्य स्रोत एशिया, मिडिल ईस्ट और अफ्रीकी देश हैं.

अफ़्रीका में Ivory Coast ने सबसे पहले इस प्रकार का बैन 2015 में लगाया था, उसके 2017 में Ghana ने भी इस नियम को लागू कर दिया था.

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