एक दौर था जब सचिन मैदान पर आते, तो पूरा स्टेडियम और देश एक ही नाम के साथ गूंज उठता. 'सचिन-सचिन' लोग तब तक चिल्लाते, जब तब वो मैदान पर अपने जौहर दिखा रहे होते. एक भगवान की तरह उनकी पूजा की जाती.

लेकिन इस 'सचिन-सचिन' आवाज़ की गूंज के पीछे मास्टर ब्लास्टर की कहानी छिपी है. सचिन बताते हैं कि 'मुझे कभी नहीं लगा था कि ये आवाज़ उनके खेल छोड़ने के बाद भी मशहूर रहेगी, ये आवाज़ मैंने सबसे पहले अपनी मां से सुनी थी. जब मैं घर के नीचे खेलने भाग जाता, तो अकसर मां मुझे बुलाने के लिए सचिन-सचिन आवाज़ लगाती थीं'.

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सचिन ने ये बात अपनी डॉक्यूमेंट्री की लॉन्च पर बताई. ए.आर.रहमान ने सचिन की इस डॉक्यूमेंट्री के लिए इस गाने को लिखा है. ए.आर.रहमान बताते हैं कि इस गाने को लिखने के लिए उन्हें लम्बा वक़्त लगा था. लेकिन सबसे बड़ी समस्या तब आई, जब उसके लिए धुन तैयार करनी थी. करीब 14 बार धुन को बनाया गया.

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इस गाने को सुखविंदर ने गाया है और बड़ी तेज़ी से ये गाना लोगों के बीच लोकप्रिय भी हो रहा है. क्रिकेट के इस देवता के ऊपर बनी इस फ़िल्म के प्रति लोगों के अंदर क्रेज़ भी दिख रहा है. अब देखते हैं कि गाने और खुद सचिन की तरह ये फ़िल्म भी लोगों के दिलों में जगह बना पाती है या नहीं.

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