'हिम्मत-ए-मर्दा तो मदद-ए-खु़दा'

कहते हैं अगर किसी काम को हिम्मत से किया जाए, तो ऊपर वाला भी उस काम में आपका पूरा साथ देता है. ऐसा ही कुछ मुंबई के संदीप देसाई के साथ भी हुआ. पेशे से प्रोफ़ेसर, संदीप को कई दफ़ा मुंबई की लोकल ट्रेन में यात्रियों से पैसे मांगते हुआ देखा गया.

दिलचस्प बात ये है कि ये ऐसा अपनी निज़ी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए नहीं, बल्कि गरीब बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए कर रहे हैं. इतना ही नहीं, एक बार भीख मांगने के जुर्म में उन्हें हर्ज़ाना भी भरना पड़ा था. NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2012 में संदीप मुंबई की स्थानीय ट्रेनों पर एक जाना पहचाना चेहरा थे. महाराष्ट्र और राजस्थान के गरीब बच्चों को अंग्रज़ी माध्यम की शिक्षा देने के लिए, वो यात्रियों से भीख मांग कर पैसे जमा कर रहे थे.

ईश्वर और यात्रियों की मदद से संदीप अपने मकसद में कामयाब रहे और 2010 से 2012 के बीच, उन्होंने 50 लाख रुपये से अधिक की धनराशि एकत्रित कर ली. NDTV से बातचीत के दौरान पश्चिमी रेलवे के यात्री रौनक महेता कहते हैं कि 'मैं करीब 2 साल से इस ट्रेन में यात्रा कर रहा हूं और उसे हर रोज़ देखता हूं. अगर वो सच्चा नहीं होता, तो हर दिन यहां नज़र नहीं आता.'

आगे बात करते हुए उन्होंने ये भी कहा कि 'भारत में बहुत से बच्चे ऐसे हैं, जो शिक्षा पाने में असमर्थ हैं. अगर हमारे छोटे से योगदान से उनका भला होता है, तो इससे बढ़ कर ख़ुशी की बात और क्या होगी.'

6 सालों के अंदर संदीप महाराष्ट्र के यवतमाल ज़िले में एक और उदयपुर के सिपुर, सदकडी और नैजहार गांव में तीन स्कूल खोलने में कामयाब रहे. यवतमाल ज़िले के विद्यालय में करीब 180 छात्र हैं और कक्षा दो तक लिए पांच शिक्षक नियुक्त किए गए हैं. वहीं उदयपुर के तीनों विद्यालयों में 310 छात्र और सात शिक्षक हैं. यवतमाल और उदयपुर का एक स्कूल सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है.

मुंबई के रहने वाले संदीप देसाई पहले मरीन इंजीनियर थे. कुछ वक़्त के बाद उन्होंने मैनेजमेंट कॉलेज में पढ़ाना शुरू कर दिया. सबसे पहले उन्होंने ये आईडिया अपने दोस्त Nurul Islam को सुनाया था और इस काम में Nurul ने उनका साथ भी दिया.

वैसे सच में दूसरों की मदद करने में जो ख़ुशी मिलती है, वो किसी और काम में कहां. आप भी कर के देखिए अच्छा लगेगा.