जब भी ऐसी तस्वीर मेरे सामने आती है, मेरा पारा चढ़ जाता है. क्या आपके पास ज़रा भी तमीज़ नहीं है? ये कोई मज़ाक है? सदियों से चले आ रहे नियम क़ायदे मज़ाक हैं? ये तस्वीर एक अपमान है, कलंक है. जो भी इसे शेयर कर रहे हैं, उन्हें शर्म आनी चाहिए.

Source: Jonas Tuason

आप महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों का हवाला दे सकते हैं, लेकिन मैं कहता हूं, क्या दुनियादारी संविधान के हिसाब से चलती है? इस महिला से मेरा नम्र निवेदन है कि अगली बार आप जब भी ऐसी तस्वीर खिंचवाएं, तो कम से कम इस बात का ज़रूर ख़्याल रखें कि जो खाना आप ऑर्डर करें, वो साफ़-साफ़ दिखे. अगर खाना ही धुंधला दिखेगा, तो ऐसी तस्वीर का क्या मतलब.

इस तस्वीर के बारे Jonas Tuason क्या कहते हैं, वो भी पढ़ने लायक है, आखिर शुरुआत तो उन्होंने ही की है.

अगर अभी तक नहीं समझे हैं, तो समझ जाईये. अभी तक इस तस्वीर के बारे में जो भी बातें हुई, उसमें पब्लिक में स्तनपान कराने पर कोई टिपण्णी नहीं थी. इसका कारण था, पब्लिक में स्तनपान कराने के टैबू को हटाना. समाज में महिलाओं को इसके लिए कई बार लताड़ा जा चुका है और तर्क ये दिया गया है कि ये 'शालीन' नहीं है. जबकि सच्चाई ये है कि बच्चे को स्तनपान कराने वाले मां के लिए उस वक़्त उसके बच्चे की ज़रूरत से बड़ी चीज़ कुछ नहीं होती. इसे अश्लील न मान कर, 'नेचुरल' ही रहने दिया जाए तो बेहतर है.