दहेज उत्‍पीड़न के दुरूपयोग के बढ़ते मामलों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फ़ैसला लिया है. IPC की धारा 498-A के ग़लत इस्तेमाल को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बीते गुरुवार गाइडलाइन्स जारी की हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है, 'दहेज प्रताड़ना मामले को देखने के लिए हर ज़िले में एक परिवार कल्याण समिति बनाई जाए और समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही पति या ससुराल पक्ष की गिरफ़्तारी होनी चाहिए, उससे पहले नहीं.'

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सुप्रीम कोर्ट ने दहेज प्रताड़ना मामले में कानून के दुरूपयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए, लीगल सर्विस अथॉरिटी से कहा है कि प्रत्येक ज़िले में परिवार कल्याण समिति का गठन किया जाए, जिसमें सिविल सोसायटी के लोग भी शामिल हों. कोर्ट ने ये भी कहा कि अगर महिला ज़ख़्मी है या फिर उत्पीड़न की वजह से उसकी मौत हो जाती है, तो ऐसे वक़्त में ये कानून मान्य नहीं होगा.

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इससे पहले 3 जुलाई 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम आदेश पारित करते हुए कहा था कि दहेज प्रथा विरोधी कानून का दुरुपयोग किया जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट की एक अन्य बेंच ने पुलिस को यह हिदायत भी दी थी कि दहेज उत्पीड़न के केस में किसी भी आरोपी की गिरफ़्तारी पूरी छानबीन और ज़रूरत पड़ने पर ही की जाए.

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