अगर आपको लगता है कि पढ़े-लिखे लोगों की सोच जातिवाद को लेकर खुली होती है, तो ये घटना आपको सच्चाई से अवगत करा सकती है. पुणे पुलिस स्टेशन में गुरुवार को एक शिकायत दर्ज की गयी. ये शिकायत एक महिला के ख़िलाफ़ थी, जो एक साइंटिस्ट के घर में कुक के तौर पर काम करती थी. महिला का नाम निर्मला यादव है. उसने अपना नाम साइंटिस्ट को निर्मला कुलकर्णी बताया था और कहा था कि वो ब्राह्मण जाति की है.

मेधा खोले वरिष्ठ IMD साइंटिस्ट हैं, उन्होंने अपनी कुक पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया है और कहा है कि उसने उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है. India Meteorological Department (मौसम विभाग) में कार्यरत साइंटिस्ट ने कहा है कि उसे अपने घर में काम करने के लिए ब्राह्मण महिला चाहिए थी, जो धार्मिक अवसरों पर भी उनके घर में खाना बना सके. पिछले साल निर्मला यादव ने उनसे संपर्क कर के कहा था कि वो ब्राह्मण हैं.

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मेधा इसकी पुष्टि करने उसके घर भी गयी थीं, लेकिन उन्हें अब जाकर पता चला कि वो ब्राह्मण नहीं, यादव हैं. मेधा ने ये आरोप भी लगाया है कि कुक ने उनके साथ गाली-गलौच की है.

सिंहगढ़ पुलिस स्टेशन पर कुक के ख़िलाफ़ भारतीय दंड संहिता की धारा 419, 352 और 504 के तहत शिकायत दर्ज की गयी है.

ये घटना दिखाती है कि जातिवाद आज भी समाज में अपनी जड़ जमाए हुआ है और नौकरी देने से पहले भी कुछ लोग जाति जानना ज़रूरी समझते हैं. कुछ लोग कितने भी आगे चले जायें पर जातिवाद से ऊपर नहीं उठ पाते. 

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