इंसान ने समय के साथ अपना विकास काफ़ी तेजी के साथ किया है. मानव सभ्यता के इस विकास की रफ़्तार की कीमत प्रकृति को चुकानी पड़ी है. इसी कड़ी में इतिहास में एक दौर ऐसा था, जब मध्य एशिया के जंगलों में केस्पियन टाइगर्स की दहाड़ें गूंजा करती थी. आज वह आवाज कहीं खो चुकी है.

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केस्पियन टाइगर्स की विलुप्ति को लेकर कुछ साफ़-साफ़ नहीं कहा जा सकता कि ये प्रजाति कब समाप्त हुई थी. कुछ का मानना है कि इन्हें आख़िरी बार 60 के दशक में देखा गया था, तो कुछ इन्हें 70 के दशक में अंतिम बार देखने की बात कहते हैं. देर आये दुरस्त आये की कहावत को चरितार्थ करते हुए विश्वभर के वैज्ञानिक मिल कर अब मध्य एशिया में, फिर से वो ही दहाड़ लोगों को सुनाने के लिए रिसर्च में जुट गये हैं.

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केस्पियन टाइगर की विलुप्त हो चुकी प्रजाति को लाने के लिए वैज्ञानिक उसके नज़दीकी रिश्तेदार, साइबेरियन टाइगर की मदद लेंगे. बायोलॉजिकल कंज़र्वेशन नामक जनरल में इस शोध के बारे में बताया गया है. इसके लिए Kazakhstan में एक-दो ऐसी जगहों को चिन्हित किया गया है, जहां इस प्रजाति को पुनर्जीवित किया जा सके. वैज्ञानिकों का उद्देश्य है कि आने वाले 50 सालों में इनकी आबादी को कम से कम 100 के आंकड़े तक पहुंचाया जाये.

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केस्पियन टाइगर को Turan Tiger के नाम से भी जाना जाता है. इसका बायोलॉजिकल नाम 'Panthera Tigris Virgata' है. अपने समय में ये तुर्की, ईरान, ईराक और उत्तर-पश्चिमी चीन के कुछ हिस्सों में पाए जाते थे. इनका वजन 300 पौंड से ज़्यादा हुआ करता था. एक व्यस्क केस्पियन प्रजाति का टाइगर 10 फ़ीट तक लंबा होता था.

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Kazakhstan के Balkhash झील वाले क्षेत्र में इन्हें रिइंट्रोड्यूज कराने के ऊपर काम किया जा रहा है, इसके लिए स्थानीय सरकार से समझौता भी किया गया है. इस क्षेत्र में इनकी सुरक्षा के साथ-साथ इनके खाने का भी विशेष प्रबंध करवाया जायेगा.

वैसे आपको बता दें, जिस साइबेरियन प्रजाति के बाघों की मदद से इस काम को अंजाम दिया जायेगा, उनकी ख़ुद की आबादी वर्तमान समय में महज़ 540 रह गई है.

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आने वाले 15 सालों के अंदर इस कार्य को अंजाम दिए जाने के प्रयास किये जा रहे हैं. बदलते दौर में इंसान ने बहुत कुछ पाया है, तो बहुत कुछ खोया भी है. जो इंसान स्वयं इस प्रकृति का अहम हिस्सा है, उसने ही इसे सबसे ज़्यादा आहत किया है. विलुप्त हो चुकी प्रजातियों के पुनर्जीवन के लिए उठाये जाने वाले प्रयासों में और भी तेजी लाकर शायद हम इस नुकसान की कुछ हद तक भरपाई कर पायें.