कहते हैं जब इंसान का शरीर ख़त्म होता है, तो उसकी रूह दूसरा शरीर धारण कर लेती है. ये आम धारणा है कि रूह अमर होती है. असल में ये हक़ीक़त है, साबित किया है दो वैज्ञानिकों ने.

दो मशहूर वैज्ञानिकों के अनुसार, हमारा शरीर एक 'Biological Computer' है और हमारी चेतना एक Program है, जिसे हमारी मृत्यु होने तक, हमारे दिमाग़ में मौजूद Quantum Computer चलाता है. वैज्ञानिकों ने आगे कहा कि हमारी मृत्यु के बाद हमारी आत्मा हमारे शरीर को छोड़ती है, लेकिन वापस इसी ब्रह्मांड में लौट आती है.

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आत्मा अमर है या नहीं, इस बारे में अलग-अलग धर्मों और विचारधाराओं के अलग मत हैं. कुछ लोग आत्मा में विश्वास रखते हैं, वहीं कुछ लोग ऐसी किसी चीज़ पर विश्वास नहीं करते हैं. महान दार्शनिक भी इस बारे में एकमत नहीं हो पाए.

लेकिन अब शोधार्थी और वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि आत्मा नहीं मरती और वापस ब्रह्मांड में ही आ जाती है. शायद ये थ्योरी हमने बचपन में पढ़ी थी एनर्जी न ख़त्म होती है, न होगी, वो अलग मीडियम या इस केस में कहें शरीर धारण कर लेती है.

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1996 में Dr. Stuart Hameroff और Sir Roger Penrose ने Quantum Theory of Consciousness पर साथ काम किया और इस नतीजे पर पहुंचे कि आत्मा Brain Cells के Microtubules में ही रह जाती है. उनकी खोज के अनुसार, मनुष्य की आत्मा उसी के शरीर का ही हिस्सा बनी रहती है.

दोनों वैज्ञानिकों का ही मानना है कि इंसान का शरीर एक Biological Computer है. इनका ये भी कहना है कि हम जिसे 'चेतना' समझते हैं असल में वो 'Quantum Gravity' का ही असर है.

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इस प्रक्रिया को दोनों वैज्ञानिकों ने 'Orchestrated Objective Reduction'(Orch-OR) नाम दिया है.

इसके अनुसार, जब किसी की Clinical Death हो जाती है, तो Brain में मौजूद Microtubules अपनी Quantum State खो देते हैं पर उनके अंदर की जानकारी Saved रहती है. दूसरे शब्दों में, मृत्यु के बाद आत्मा ब्रह्मांड में ही रहती है.

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