बॉलीवुड में शादियां जल्द ही अपना चार्म खो देती हैं या फिर उस रिश्ते को निभाने के लिए काफ़ी संघर्ष करना पड़ता है. ऐसे में शाहरुख़ और गौरी की जादुई प्रेमी कहानी सभी के लिए मिसाल है. इस कपल की ख़ूबसूरत सी लव स्टोरी किसी फ़िल्मी कहानी से कम नहीं.

पहली नज़र में हो गया था गौरी से प्यार

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लाखों-करोड़ों दिलों पर राज़ करने वाले बॉलीवुड के किंग खान पहली नज़र में गौरी को अपना दिल दे बैठे थे. दोनों की मुलाक़ात एक दोस्त की पार्टी में हुई थी. गौरी किसी लड़के के साथ डांस कर रही थी. वहीं जब काफ़ी हिम्मत करके किंग खान ने गौरी से डांस के लिए पूछा, तो उन्होंने ये कह कर मना कर दिया कि वो अपने बॉयफ़्रेंड का इंतज़ार कर रही हैं. ये बोल कर जैसे उन्होंने शाहरुख़ का दिल तोड़ दिया, लेकिन बाद में जैसे ही शाहरुख़ को पता चला कि वो शख़्स उनका भाई है, तो उन्होंने गौरी से कहा कि 'मुझे भी अपना भाई समझो' और यहीं से शुरू हुई दोनों की ख़ूबसूरत सी प्रेमी कहानी.

गौरी को लेकर काफ़ी Possessive थे किंग खान

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गौरी को शाहरुख का स्टाइल और कॉन्फ़िडेंस काफ़ी पसंद आया और दोनों एक-दूसरे के साथ वक़्त बिताने लगे. किंग खान भी आम लड़के की तरह अपनी गर्लफ़्रेंड को लेकर काफ़ी Possessive थे. वो गौरी को अकेले नहीं रहने देते थे. इसके अलावा उन्हें गौरी का दूसरे लड़कों से बात करना भी नहीं पसंद था. शाहरुख का ये बर्ताव गौरी को बिल्कुल पसंद नहीं आ रहा था और यही वजह थी कि वो रिश्ते से ब्रेक लेने के लिए शाहरुख को बिना बताए मुंबई चली गई.

जब दोनों को हुआ प्यार का अहसास

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अब तक शाहरुख़ को अहसास हो गया था कि वो गौरी से मोहब्बत करने लगे हैं और उन्होंने ये सारी बातें अपनी मां से शेयर की, उनकी मां ने न सिर्फ़ गौरी को ढूंढने की सलाह दी, बल्कि मुंबई जाने के लिए उन्हें 10 हज़ार रुपये भी दिए. गौरी की तलाश में किंग खान मुंबई पहुंचे, पर काफ़ी कोशिशों के बाद भी उन्हें गौरी नहीं मिल पा रही थी, लेकिन शाहरुख़ ने भी हार नहीं मानी. मुंबई के एक बीच पर उन्होंने गौरी को खोज निकाला. दोनों एक-दूसरे को देखते ही गले लग कर रोने लगे, बस यही लम्हा था जब दोनों ने प्यार का क़बूलनामा पढ़ते हुए शादी करने का फ़ैसला लिया.

फ़िल्मी ड्रामा

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इस जोड़े की शादी में सबसे रोड़ा उनका धर्म था. गौरी एक ब्राह्मण परिवार से आती थी, जहां शुद्ध शाकाहारी खाना बनता था. ऐसे में एक मुस्लिम लड़के शादी करना बिल्कुल भी आसान काम नहीं था. इसके अलावा शाहरुख के करियर का भी कुछ अता-पता नहीं था, जिस कारण इस शादी के लिए घरवालों का हांमी भरना काफ़ी मुश्किल था.

रिश्ते को मिल गया शादी का नाम

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काफ़ी मुश्किलों का सामना करने के बाद शाहरुख गौरी के परिवालों को मनाने में कामयाब रहे और आखिरकार 25 अक्टूबर 1991 का वो दिन आ ही गया, जब दोनों ने शादी के बंधन में बंध अपने रिश्ते को नया आयाम दिया.

जोड़ी बन गई मिसाल

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अलग-अलग जाति से होने के बावजूद दोनों ने अपने रिश्ते को काफ़ी ख़ूबसूरती से निभाया. इवेंट कोई भी हो शाहरुख और गौरी हर जगह साथ ही नज़र आते हैं. घर और बच्चों की देख-रेख के साथ-साथ, गौरी शाहरुख के बिज़नेस में भी हाथ बंटाती हैं. फ्लॉप से लेकर हिट तक गौरी ने हर पल शिद्दत से शाहरुख का साथ निभाया, तो वहीं शाहरुख भी अपनी बीवी और बच्चों को खु़श रखने में कोई कसर नहीं छोड़ते.

शाहरुख़ और गौरी की ये अनोखी लव स्टोरी कैसी लगी, कमेंट बॉक्स में प्रतिक्रिया दे सकते हैं.