आशा है, आपने इस कहानी का पार्ट 1 पढ़ा होगा. अगर नहीं, तो इस लिंक पर क्लिक करें और पढ़ें.

Part 1 Link: gazabpost.com

आपने ये कहानी पसंद की, और इसको बढ़ने की मांग की, इसलिए अब हाज़िर है इसका पार्ट 2.

... फिर उसने अपने आप को सम्हाला और अपने ऑफ़िस की ओर चल पड़ी. रस्ते भर वो यही सोचती रही, कि उसे उस लड़के के बारे में गलत नहीं सोचना चाहिए था. देखने में इतना अच्छा, और आंखें नहीं? शायद उसे खुद भी अपनी खूबसूरती का पता नहीं. अगर वो देख पाता तो…

सोचते-सोचते वो अपने स्कूल पहुंच गयी, जहां की वो वाईस प्रिंसिपल थी.

आज काम में कुछ मन नहीं लग रहा था. तभी आवाज़ आई... "मिस तृप्ति, आपको प्रिंसिपल ने बुलाया है".

तृप्ति को पता था कि प्रिंसिपल क्या पूछेंगी. खैर वो उनके केबिन की ओर चल पड़ी.

"इसमें इतनी देर क्यों लग रही है? एनुअल फंक्शन के अलावा assemblies हैं, इंटर-स्कूल कॉम्पटीशन्स हैं, बच्चों की एक्टिविटीज़ हैं, कैसे होगा सब?"प्रिंसिपल बोलीं.

तृप्ति पूरी ज़िम्मेदारी लेते हुए बोली, "मैम, आई अंडरस्टैंड! हम try कर रहे हैं... जल्दी ही solution मिल जाएगा. I promise!"

"Hmmm... I hope so!" प्रिंसिपल थोड़ा शांत हो कर बोलीं.

इतना कहते ही तृप्ति प्रिंसिपल के ऑफ़िस से बाहर आ गयी.

तबतक दौड़ते-दौड़ते स्कूल का पिओन श्यामलाल उसके पास आया, और बोला, "मैम, मैं कबसे आपका इंतज़ार कर रहा हूं. जल्दी से अपने केबिन में जाइये, कैंडिडेट वेट कर रहा है”.

अब जाकर तृप्ति की जान में जान आई.

"अरे? ये क्या? वही मेट्रो वाला लड़का? ये कैसे हो सकता है?" उसने सोचा. पर उसके दिल में जैसे गुदगुदी हो रही थी. वो उस लड़के को अपने दिमाग से निकल नहीं पाई थी, वो मन ही मन चाहती थी उससे कम से कम एक मुलाकात तो हो, और अब वो लड़का उसके सामने था.

"Hi, I'm Madhur Rai. मुझे आपके स्कूल में म्यूज़िक टीचर की vacancy के बारे में यहां के एक टीचर से पता चला. ये हैं मेरी degrees, certificates और CV. Sorry, जिस sequence में हैं, उन्हीं में रख दीजियेगा देखने के बाद."

"Ya sure!" और क्या कहती वो. उसे मालूम था की वो देख नहीं सकता था.

"Hmmm… मधुर, मैं तृप्ति, यहां की वाईस प्रिंसिपल. Nice to meet you! आपका प्रोफ़ाइल काफ़ी अच्छा है. "

"जी?" वो आश्चर्य से बोला.

"यस, आपका एक्सपीरियंस इतना है, आप म्यूजिक भी कंपोज़ करते हैं, फिर आप स्कूल में क्यों पढ़ाना चाहते हैं?"

"तृप्ति जी, आप समझ सकती हे, कि मेरी कुछ limitations हैं. मैं चाहता तो बहुत कुछ हूं, पर सबकुछ कर नहीं सकता. और जो करूंगा, वो सिर्फ़ अपने बल पर करूंगा. शायद थोड़ा वक़्त लगे, पर अभी शुरुआत है. हर नई जगह से मुझे उम्मीद रहती है. नए लोगों से मिलने की चाह रहती है."

उसने मुस्कुरा कर कहा,"ठीक है मधुर जी, I think you suit the profile."

"Thank you!" ये कह कर वो जैसे ही खड़ा हुआ, अपना सामन समेट जाने को हुआ, तो फ़िर रुका… और बोला,“I’m sorry, but आपके पास से वैसी महक आ रही है, जो मुझे थोड़ी देर पहले मेट्रो मेंबैठते वक़्त आ रही थी.”

अब वो और क्या मांग सकती थी! मधुर ने उसे देखा भले ही न हो, पर महसूस किया था!

यहां उसकी कहानी खत्म नहीं, बस शुरू हुई है.