कुछ फ़िल्में देखते वक़्त कभी-कभी हमें ऐसा लगता है कि अरे ये कैरक्टर, तो हमारी असल ज़िंदगी से बिलकुल मेल ख़ाता है, तो वहीं कभी-कभी ऐसा भी लगने लगता है कि क्या सच में किसी के साथ ऐसा हो सकता है?

ऐसी ही एक फ़िल्मी कहानी उस वक़्त सच हो गई, जब जबलपुर के 10 साल के बच्चे को एक दिन के लिए मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग का अध्यक्ष बनाया गया. 10 साल का श्रेयांश बाघमारे आम बच्चों से काफ़ी अलग है क्योंकि श्रेयांश प्रोज़ेरिया नाम की बीमारी से ग्रसित है. प्रोज़ेरिया एक ऐसी बीमारी है, जिसमें छोटी उम्र के बच्चों में बुढ़ापे के लक्षण दिखने लगते हैं.

मध्यप्रदेश बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष डॉ. राघवेन्द्र शर्मा ने PTI को बताया कि श्रेयांश ने भोपाल घूमने की इच्छा ज़ाहिर की थी, उसको ख़ुश करने के लिए हमने उसे एक दिन के लिए आयोग का अध्यक्ष बनाने का फ़ैसला लिया.

उन्होंने बताया कि श्रेयांश ने यहां आकर एक कार्यक्रम में बतौर अध्यक्ष हिस्सा भी लिया.

श्रेयांश के पिता अरविंद बाघमारे ने बताया कि शुक्रवार को अध्यक्ष बनकर वो काफ़ी ख़ुश था. उन्होंने ये भी कहा, ‘श्रेयांश को हमने नागपुर के अस्पताल में दिखाया था. डॉक्टरों ने यही कहा कि इस बीमारी का इलाज़ कुछ नहीं है. ऐसे बच्चे अल्पायु होते हैं, इसलिए उन्हें हर समय खुश रखने का प्रयास करना चाहिए.’

श्रेयांश का जुड़वा भाई सिद्धार्थ बिल्कुल नार्मल है और दोनों भाई क्लास 5th में पढ़ते हैं.

श्रेयांश को पढ़ाई में काफ़ी अधिक रुचि है. वो स्कूल में नॉर्मल बच्चों की तरह है. कभी-कभी स्कूल के बच्चे उसकी इस बीमारी का मज़ाक बनाकर उसे इरिटेट कर देते हैं.

गौरतलब हैं कि आर बाल्की की फिल्म 'पा' में अमिताभ बच्चन ने ऐसे ही एक बच्चे की भूमिका निभाई थी और ऐसे मरीजों की समस्याओं को दिखाया था. श्रेयांश महानायक अमिताभ बच्चन का बहुत बड़ा फैन है और उनसे मिलने की इच्छा ज़ाहिर कर चुका है.

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