NGO, ये शब्द सुनते ही हमारे मन में संतुष्टि का भाव आ जाता है कि कोई संस्था बिना किसी फ़ायदे के समाज की भलाई का काम कर रही है. पर इस दुनिया में हर चीज़ को बदनाम करने वाले पैदा हो गए हैं. NGO की गरिमा पर धब्बा लगाने का भी काम शुरु हो चुका है. पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के फालाकता क्षेत्र में 'बिमला शिशु गृहो' नाम का एक NGO है, जिसके चेयरपर्सन को CID की टीम ने सोमवार का गिरफ़्तार कर लिया. चेयरपर्सन चंदना चक्रवर्ती पर ये आरोप है कि वो NGO की आड़ में गोद लिए गए बच्चों को बड़े दाम में इंडिया और उसके बाहर के निःसंतान दंपतियों को बेच देती थी.

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ऐसा बताया जा रहा है कि चंदना ने अभी तक 17 बच्चों को 1 से 2 लाख रुपये की कीमत के हिसाब से बेचा है. बेचे जा रहे बच्चों की उम्र 1 साल से लेकर 14 साल तक की है. CID की टीम ने NGO के चीफ़ एडॉप्शन ऑफ़िसर सोनाली मंडल को भी गिरफ़्तार कर लिया है. पश्चिम बंगाल की महिला और बाल विकास मंत्री रश्मि सेन ने बताया कि ये बहुत हैरानी की बात है. चंदना बेसहारा औरतों के लिए एक अनाथालय भी चलाती थी और फिर उनके बच्चों को भी गायब करके बेच देती थी. तीन महीने में चार बच्चों के गायब होने की बात से पुलिस सकते में आई थी और फिर एक टीम ने अपनी जांच शुरू कर दी.

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CID को शक़ है कि इस चंदना का लिंक एक स्थानीय बीजेपी नेता के साथ है, जिसने हर समय फंड्स और छूट दिलाने में इसकी मदद की है. शक़ के दायरे में लोकल बीजेपी नेता जूही चौधरी हैं. अभी तक इस केस में डॉक्टरों के अलावा, 18 लोग गिरफ़्तार किये जा चुके हैं. बच्चों को बेचने के लिए ये लोग नकली स्टाम्प, नकली डाक्यूमेंट्स का इस्तेमाल करते थे. आपको बता दें कि सरकार किसी लापरवाही के कारण इनको पहले भी चेतावनी दे चुकी थी. चूंकि पूरे जिले में ये अकेला ऐसा अनाथालय था, जिसे Central Adoption Resource Authority द्वारा रजिस्टर करवाया गया था. इसलिए बच्चों को गोद लेने का अधिकार कर इसी को था. आरोपियों ने इसी बात का खूब फ़ायदा उठाया.

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सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल के मुक़ाबले इस साल मानव तस्करी के मामले 25 प्रतिशत तक बढ़ गये हैं. सबसे ज़्यादा केसों में तस्करी बच्चों की हुई है.

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