आज के बदलते दौर में महिलायें पुरुषों के कंधे से कन्धा मिलाकर चल रही हैं. आज की महिलायें पुरुषों की तरह ही हर तरह का काम करने का हौसला रखती हैं, फिर चाहे वो कितना ही चुनौतीपूर्ण क्यों न हो. आज कई महिलायें ट्रक, बस, ऑटो आदि भी चलाती हैं. कैब चलाना हो या टैक्सी चलना महिलाओं के लिए कुछ भी असंभव नहीं है अब. वहीँ पुलिस भी अब पब्लिक ट्रांसपोर्ट की इन महिला ड्राइवर्स की मदद के लिए तत्पर रहती है. सिक्किम से कुछ ऐसी ही ख़बर आ रही है.

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सिक्किम की 7 महिला टैक्सी ड्राइवर्स को उनको खुद का टैक्सी स्टैंड दिलवाने में सिक्किम ट्रैफ़िक पुलिस ने बहुत मदद की. इन सातों महिला टैक्सी ड्राइवर्स के पास टैक्सी चलाने का लाइसेंस भी है. जब इन ड्राइवर्स को उनका टर्न-एलौटमेंट देने से टैक्सी एसोसिएशन ने इनकार कर दिया, तब वहां की ट्रैफ़िक पुलिस ने इनकी मदद की और इनको गंगटोक में स्थित Bansial petrol pump के पास टैक्सी स्टैंड के लिए जगह दिलवाई.

वैसे तो देश के किसी भी शहर में ये आम बात है कि टैक्सी एसोसिएशन पर पूरी तरह से पुरुषों का ही प्रभुत्व होता है.

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पुलिस के ASP, Ongmu Bhutia ने कहा, केवल एक महिला ड्राइवर ही अलग टैक्सी स्टैंड में टर्न-एलौटमेंट प्राप्त करने में कामयाब रही. इसके साथ ही इस उच्च अधिकारी ने कहा, 'उस समय पुरुष टैक्सी चालकों ने टैक्सी स्टैंड में महिलाओं का स्वागत तो नहीं किया, बल्कि उनको हतोत्साहित ज़रूर किया. इसीलिए पुलिस ने इन महिलाओं की मदद करने का फैसला किया, क्योंकि वैसे भी सिक्किम महिला समर्थक एक राज्य है.'

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इतना ही नहीं प्रगतिशील-सोच रखने वाले पुलिस बल ने महिला चालकों को सुरक्षित रूप से ड्राइव करने की सलाह भी दी.

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बेशक, ये महिलायें उनकी सहायता के लिए पुलिस की बहुत आभारी हैं. खुद के प्रति एक प्रकार के भेदभाव का सामना करना पड़ा है इन महिलाओं को, इसीलिए ये महिलायें नहीं चाहती हैं कि आने वाले समय में किसी भी दूसरी महिला टैक्सी ड्राइवर्स को इस भेदभाव को न झेलना पड़े. वो सब कहती हैं कि हम हमेशा उन महिलाओं का उत्साहवर्धन करेंगे, जो ड्राइविंग को बतौर प्रोफ़ेशन अपनाना चाहती है. साथ ही सन्ज में एक मिसाल कायम करने में उनकी मदद भी करेंगे.

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