अकसर कपड़े आॅनलाइन खरीदते वक्त आप अपने साइज़ के लिए दुविधा में पड़े होंगे. कभी आपको 'L' साइज़ फिट आ जाता है तो कभी 'XL' भी छोटा लगने लगता है. बड़े शौक से खरीदे गए जूते जब घर पहुचते हैं ​तो पता चलाता है कि ये तो पांच साल पुराना वाला साइज़ आ गया. कोई बड़ी बात नहीं है कि लोग कपड़ों का बढ़ा हुआ साइज़ देख कर डिप्रेशन में आ जाएं!

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अगर आप भी ऐसे किसी डिप्रेशन के शिकार हुए हैं या कपड़ों का बढ़ा साइज़ देख कर डाइटिंग कर चुके हैं तो अब टेंशन की बात नहीं है.

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दरअसल साइज़ के इस हेर-फेर को 'Vanity Sizing' कहते हैं. Vanity Sizing मतलब कपड़ों के साइज़ को टैग पर छोटा दिखाया जाता है जितना वो असलियत में नहीं होता.

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ये काम बिक्री बढ़ाने के लिए किया जाता है. लोग बड़े साइज़ को अपने इगो पर लेकर छोटा साइज़ खरीदते हैं. मतलब जितना छोटा साइज़, उतनी ज़्यादा बिक्री. फेसबुक पर एक महिला ने कंपनियों की इसी ट्रिक के सबूत लोगों के सामने रखे हैं.

Missy Rogers ने फेसबुक पर अपनी दो शॉर्ट्स की तस्वीर शेयर की. दोनों एक ही कंपनी की थीं. दोनो का साइज़ और कमर एक थे, मगर एक साइज़ 10 का था और दूसरा साइज़ 4 का. Missy ने दोनों को कुछ महीनों के अंतर में खरीदा था. Missy ने कपड़ों के स्टोर पर जाते ही सबसे पहले साइज़ 4 खोजना शुरू किया जो कि वो पहले से पहन रही थी, पर उसे फिट साइज़ 10 आया. ये देख कर उसे लगा कि क्या उसका वज़न या कमर बढ़ी है. बाद में जब उसने घर आ कर दोनों शॉर्ट्स को एक साथ रख कर देखा तो पाया कि दोनों एक ही साइज़ के थे.

इस चार्ट में आपको पता चलेगा कि कैसे अलग अलग समय में साइज बदलते गए, जबकी लोगों का साइज़ उतना ही रहा.

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जो 1958 में साइज़ 0 था वो 2011 में साइज़ 4 हो गया. साइज़ के इस झोल को देख कर हम आपको यही सलाह देंगे​ कि पतले होने पर ज़्यादा ज़ोर देने से बेहतर है कि आप अपने साइज़ के हिसाब से आरामदायक कपड़े खरीदें. ये साइज़ अलग-अलग ब्रांड्स और देशों में अलग-अलग होते हैं.

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स्ट्रीट फैशन आपको फैशन के साथ कम्फर्ट भी देता है. पर ब्रांड के साइज़ टैग लोगों को बताते हैं कि उनका शरीर फैशन के लायक नहीं है.