केरल का नाम सुनते ही हमारे दिमाग़ में जो पहली बात आती है, वो है यहां की साक्षरता दर. शिक्षा के मामले में ये राज्य भारत के अन्य राज्यों का रोल मॉडल रहा है. जहां एक तरफ़ देश के कई राज्यों में सरकारी स्कूल के लिए बिल्डिंग और शिक्षक न होने की ख़बरें आए दिन आती हैं, वहीं केरल में शिक्षा के लिए राज्य सरकार की गंभीरता क़ाबिल-ए-तारीफ़ है.

2011 की जनगणना के मुताबिक, यहां की साक्षरता दर 93.91% है. जबकि 2016 में इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट की मानें, तो प्राथमिक शिक्षा के मामले में इस राज्य ने 100% का आंकड़ा छू लिया है.

जून से हो जाएंगे सभी सरकारी स्कूल स्मार्ट

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शिक्षा को मिशन मानने वाले इस राज्य ने क्वालिटी एजुकेशन की ओर एक और कदम बढ़ाया है. राज्य के शिक्षा विभाग ने 'सूचना और संचार' का महत्व देते हुए एक अहम फ़ैसला लिया है. जून 2017 से यहां सभी 9279 सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा से ही डिजिटल एजुकेशन अनिवार्य हो जाएगी. इसके लिए शिक्षकों की ट्रेनिंग शुरू हो गई है.

डिजिटल किताबों से कम हो जाएगा बैग का बोझ

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राज्य सरकार ने मिशन '[email protected] Project' के अंतर्गत 2005 से ही हाई स्कूल(8th to 12th) में डिजिटल शिक्षा की व्यवस्था की थी. मगर अब Lower Primary और Upper Primary की कक्षाओं में भी कंप्यूटर लैब और स्मार्ट क्लास से पढ़ाई होगी. इसके लिए शिक्षा विभाग ने '[email protected]' नाम से हर विषय की Text Book बनाई हैं, जो एक Free Open Source सॉफ्टवेयर है. ये किताबें मलयालम, अंग्रेज़ी, तमिल और कन्नड़ में उपलब्ध रहेंगी, जिससे बच्चों को भाषा की समस्या न आए.

केरल सरकार का ये फ़ैसला हमें ये बताने के लिए काफ़ी है कि सरकारें अगर अपने कर्तव्य के प्रति गंभीर हों, तो लोगों के मूलभूत अधिकार जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, भोजन आदि को सभी तक पहुंचाया जा सकता है. वो कहते हैं न ' जहां चाह, वहां राह'.

बाकी हिंदी प्रदेश के सरकारी स्कूलों की कहानी आपसे छुपी नहीं है.

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