जब देश आज़ाद हो रहा था, उस समय कई समस्याओं से जूझ रहा था. एक ओर आज़ादी की मांग चल रही थी, दूसरी ओर सामाजिक बुराईयों से. अंग्रेज़ देशवासियों पर अत्याचार कर रहे थे, वहीं सामंतवादी सोच से भी लोग परेशान दिख रहे थे. उस समय देश को अंग्रेज़ों से ज़्यादा सामंतियों से आज़ादी की ज़रूरत थी. जाति-पात, धर्म के नाम पर लोग आपस में घृणा कर रहे थे. इससे देश कमजोर हो रहा था. मौके की नज़ाकत को देखते हुए देश के कई समाज-सुधारकों ने समाजिक बुराईयों को ख़त्म करने की कोशिश की. आइए, समाज में दिए उनके योगदान के बारे में जानते हैं.

राजा राम मोहन राय (1772-1833)

सामाजिक सुधार के लिए जितना योगदान राजा राम मोहन राय का इस देश में रहा, वो अतुल्नीय है. दहेज प्रथा, बाल-विवाह, छुआछूत जैसी कुप्रथाओं का विरोध किया, तथा इसके लिए कड़े कानून की भी वकालत की.

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महात्मा गांधी (1869-1948)

बात जब सामाजिक सुधार की हो, तो महात्मा गांधी इस सूची में सबसे पहले आते हैं. देश की आज़ादी हो, ग़रीबी उन्मूलन हो या फ़िर सामाजिक सुधार, महात्मा गांधी ने निष्पक्षता के साथ अपना योगदान दिया है. इस वजह से देश में गांधी जी को 'राष्ट्रपिता' का दर्जा मिला हुआ है.

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ईश्वर चंद्र विद्यासागर (1820-1891)

अविभाजित बंगाल में समाजिक बुराईयों को दूर करने के लिए ईश्वर चंद्र विद्यासागर का योगदान अद्वितीय है. वे बंगाल के सामंतियों, पंडितों और ज़मींनदारों का विरोध करते रहे. इसके अलावा विधवा-विवाह पर भी उन्होंने ख़ूब ज़ोर दिया.

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डॉ. भीमराव अंबेडकर (1891-1956)

भारत को हिन्दू आडंबरों से मुक्ति दिलाने का श्रेय डॉ. भीमराव अंबेडकर को जाता है. वे न सिर्फ़ एक कानूनविद् थे, बल्कि इस देश के पिलर भी थे. हिन्दुओं के बीच हो रहे भेदभाव को मिटाने के लिए उन्होंने बहुत मेहनत की. समाजिक क्षेत्र में सहयोग देने के लिए उन्हें 'भारत रत्न' से नवाज़ा गया है.

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जवाहर लाल नेहरू (1889-1964)

जवाहर लाल नेहरू भारत के न सिर्फ़ प्रथम प्रधानमंत्री, बल्कि स्वतंत्रता सेनानी भी थे. देश की आर्थिक मज़बूती, सामाजिक सुधार के लिए इन्होंने कई ऐसे कदम लिए, जिसका लाभ अभी भी देश को मिल रहा है.

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मदर टेरेसा (1910-1997)

मानवता की मिसाल मदर टेरेसा का योगदान भला कौन भूल सकता है. लोगों के कल्याण के लिए इन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी खपा दी. समाजिक बुराईयों को दूर करने में इनका योगदान अकथनीय है.

Source: Biography

बाबा आम्टे (1914-2008)

यूं तो बाबा आम्टे का जन्म एक अमीर घर में हुआ था. इन सबके बावजूद भौतिक सुख-सुविधाओं का त्याग कर, उन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी मानव कल्याण में लगा दी.

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एनी बेसेंट (1847-1933)

विदेशी होकर भी एनी बेसेंट ने भारत के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया. समाज के वंचित तबकों के लिए एनी बेसेंट ने अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ ही युद्ध छेड़ दिया. वे अंग्रेज़ों की दमनकारी नीतियों का हमेशा विरोध करती रहीं. इसके लिए उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा.

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स्वामी दयानंद सरस्वती (1824-1883)

वैसे तो स्वामी दयानंद सरस्वती को आर्य समाज के संस्थापक के रूप में जाना जाता है. हिन्दू धर्म में हो रहे पाखंड को खत्म करने के लिए उन्होंने आर्य समाज की स्थापना की. वे मूर्ति पूजन का विरोध करते थे. इस वजह से हिन्दू समाज में एकता देखने को मिली.

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स्वामी विवेकानंद (1863-1902)

स्वामी विवेकानंद को देश में एक विचारक रूप में जाना जाता है. 19वीं सदी में हो रही सामाजिक बुराईयों को ख़त्म करने के लिए 'रामकृष्ण मिशन' की स्थापना की. स्वामी विवेकानंद के विचारों को लोग आज भी अपनी ज़िंदगी में अपनाते हैं.

Source: Khabar

एक देश के विकास के लिए जितना आर्थिक बदलाव का महत्व है, उससे कहीं ज़्यादा महत्व सामाजिक बदलाव का है. इससे किसी भी देश का चाल और चरित्र तय होता है. देश के समाज सुधारकों ने अपनी मेहनत से एक ऐसे 'हिन्दुस्तान' की कल्पना की, जो समाजिक और आर्थिक रूप से काफ़ी सशक्त बन सके.