ये हैं शाइस्ता अम्बर. लखनऊ की पहली महिला मस्जिद की संस्थापक. आज से करीब 20 साल पहले जब इन्हें एक स्थानीय मस्जिद के इमाम द्वारा बेटे के साथ मस्जिद आने से मना कर दिया गया, तभी इन्होंने महिलाओं के लिए 'अम्बर मस्जिद' की स्थापना करने का फ़ैसला ले लिया था. और आज आलम ये है कि लखनऊ की पीजीआई रोड स्थित अम्बर मस्जिद अपनी 20 वीं सालगिरह के मौके पर पूरी तरह सौर ऊर्जा से लैस भारत की पहली महिला मस्जिद बन गई है.

शाइस्ता अम्बर के इस कदम का मकसद मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की बात करना, उन्हें शिक्षित करना और पूरी तरह से सशक्त बनाना है. इस लिहाज़ से अम्बर मस्जिद इन्हें संवाद का मंच देने में अनूठी भूमिका अदा कर रही है.

शाइस्ता कहती हैं, अल्लाह की दी हुई है सूरज की रौशनी, कभी खत्म नहीं होगी. सौर ऊर्जा के कई लाभ हैं. ये पर्यावरण के हिसाब से भी काफ़ी उत्तम है.

अब यह अम्बर मस्जिद सोलर पैनल श्रृंखला से बिजली उत्पादन का कार्य करेगी. इस मस्जिद की छत पर सौर पैनल की स्थापना करने का मतलब सिर्फ़ मस्जिद के लिए बिजली बनाना नहीं है, बल्कि इसके अतिरिक्त ये बिजली ग्रिड को भी बिजली देगी.

डाटा ज़र्नलिज़्म कंपनी IndiaSpend की प्रतिनिधी आरती खोसला के मुताबिक, बिजली कटौती उत्तर प्रदेश में लोगों के लिए एक बड़ी समस्या है. अध्ययन के मुताबिक, करीब 40 फीसदी मतदाताओं को हर दिन बिजली कटौती और असमय बिजली गुल हो जाने की समस्या का सामना करना पड़ता है.

IndiaSpend के अध्ययन में यह भी पाया गया कि यूपी के करीब 97 प्रतिशत मतदाता सौर ऊर्जा को लागू करने के पक्ष में हैं. अगर ऐसा होता है, तो इससे वायु प्रदूषण में कमी आएगी और बिजली कटौती की समस्या से भी निजात मिल पायेगा.

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सबसे खास बात ये रही है कि मंगलवार को 'अंबर मस्जिद' के सोलर प्रोजेक्ट के उद्घाटन के मौक पर लखनऊ के सभी धर्मों के मसलन, हिंदू, सिख, इसाई और मुस्लिम धार्मिक नेताओं ने भाग लिया.

हालांकि, शाइस्ता के लिए सोलर पैनेल महज एक शुरुआत है. उनका इरादा तो सारे समुदायों के लोगों को सोलर एनर्जी के फ़ायदों के प्रति जागरूक करना है.

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