एशिया का सबसे बड़ा रेड लाइट एरिया, सोनागाछी. कोलकाता की इस जगह पर हज़ारों लड़कियां और महिलाएं रहती हैं और यौन व्यापार कर जीवनयापन करती हैं.

भारत में देह व्यापार को सबसे Legal Illegal काम में गिना जाता है. मतलब ये कि ये ग़ैरक़ानूनी होते हुए भी क़ानूनी है.

बदनाम इन गलियों ने अब नाम कमाना शुरू कर दिया है.

'आमरा पदातिक' नाम से लड़कियों की पहली फ़ुटबॉल टीम बन गई है जो अगस्त के पहले हफ़्ते से ट्रेनिंग शुरू करेगी.

दरबार महिला समन्वय कमिटी द्वारा ये पहल की गई है. ये कमिटी सेक्स वर्कर्स और उनके बच्चों के हक़ के लिए लड़ती है. सेक्स वर्कर्स के बच्चे अपनी मां के काम के कारण समाज की दुत्कार भुगतते हैं. फ़ुटबॉल के ज़रिए इस सोच को बदलने की ये कोशिश सराहनीय है.

TOI ने इस टीम में शामिल कुछ लड़कियों से बात की. 10वीं कक्षा की छात्रा ज़ोया शेख़ (बदला हुआ नाम) ने बताया,

पहले मुझे ज़रा हिचकिचाहट हुई. पर जब मैंने अपनी उम्र के लड़कों को ये खेल खेलता देखा और सोचा जब ये खेल सकते हैं तो मैं बिना किसी सामाजिक दबाव के क्यों नहीं खेल सकती? यही सोच मुझे फ़ुटबॉल खेलने के लिए प्रेरित करती है. पढ़ाई से जब भी वक़्त मिलता है, मैं फ़ुटबॉल खेलती हूं.

बेल्जियम के हारने का अफ़सोस भी है इस उभरती खिलाड़ी को.

9वीं में पढ़ने वाली अन्खी दास ने TOI को बताया,

लड़कियों के फ़ुटबॉल न खेलने वाले नियम को इंसान ने ही बनाया है. वक़्त आ गया है कि इन सब भ्रान्तियों को तोड़ा जाए और साबित किया जाए कि लड़कियां भी बहुत अच्छा फ़ुटबॉल खेल सकती हैं.

दरबार महिला समन्वय कमिटी की चीफ़ एडवाइज़र स्मराजित जना ने टीम के बारे में बताते हुए कहा

लड़कियों से ही टीम बनाने का आइडिया आया. वर्ल्ड कप को लेकर इन बच्चियों में काफ़ी उत्साह था. मुझे लड़कियों के हमेशा फ़ोन आते थे कि वो फ़ुटबॉल खेलना चाहती हैं. पर लोगों क्या कहेंगे, ये सोचकर वो संकोच भी कर रही थीं. समाज में जागरूकता की आज भी बेहद कमी है.

8 लड़कियों की ये टीम शोभाबाज़ार के पास बी.के.पॉल ग्राउंड में ट्रेनिंग शुरू करेगी. बाद में और लड़कियां भी इस टीम से जुड़ेंगी.

हम सभी की शुभकामनाएं इन बच्चियों के साथ है.