danny denzongpa
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70 के दशक में राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन, जितेंद्र और विनोद खन्ना जैसे स्टार्स का बोलबाला था.इस दौर में एक उत्तर-पूर्वी भारतीय एक्टर ने भी बॉलीवुड में कदम रखा था.इनका नाम था शेरिंग पिंटो डेंजोंगपा, जिन्हें आप डैनी डेंजोंगपा के नाम से जानते हैं.इन्होंने दिग्गज बॉलीवुड स्टार्स के बीच इंडस्ट्री में डेब्यू किया और अपना एक अलग मुकाम बनाया.आज डैनी को पूरी दुनिया बॉलीवुड के एक बेहतरीन विलेन के तौर पर जानती है.मगर क्या आप जानते हैं कि डैनी ने अपने करियर की शुरुआत एक एक्टर के रूप में नहीं, बल्कि बतौर प्लेबैक सिंगर की थी?

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जी हां, अपनी ख़लनायकी के लिए फे़मस डैनी डेंज़ोगपा ने अपने करियर की शुरुआत एक्टर के रूप में नहीं बल्कि बतौर सिंगर की थी.हुआ यूं कि 1970 में उनकी काबलियत को देखते हुए प्रोड्यूसर आत्माराम ने उन्हें अपनी फ़िल्म ये गुलिस्तां हमारा के लिए कास्ट कर लिया.इस फ़िल्म में उन्हें एक छोटा-सा किरदार निभाना था और साथ में उन पर एक गाना भी फ़िल्माया जाना था.अपनी पहली फ़िल्म को लेकर डैनी काफ़ी ख़ुश थे, लेकिन उनकी ये ख़ुशी ज़्यादा देर तक टिक ना सकी, बहुत जल्द ही उन्हें इस फ़िल्म से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया.

इस तरह शुरु हुआ सिंगिंग करियर

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दरअसल , आत्माराम और फे़मस कॉमेडियन जॉनी वॉकर बहुत ही अच्छे दोस्त थे.आत्माराम जब ये फ़िल्म बना रहे थे उसी वक्त वॉकर साहब उनके पास काम मांगने आ गए और इस तरह डैनी वाला रोल उन्हें मिल गया.लेकिन फिर भी उन्हें इस फ़िल्म में एक रोल ऑफ़र किया गया, मगर डैनी की किस्मत इतनी ख़राब थी कि ये रोल भी दूसरे एक्टर सुजीत कुमार की झोली में चला गया.

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इस प्रकार डैनी अपनी पहली ही फ़िल्म से बाहर कर दिए गए लेकिन आत्माराम इस फ़िल्म के एक गाने को डैनी की आवाज में रिकॉर्ड करना चाहते थे क्योंकि इस फ़िल्म में जॉनी वॉकर वाला किरदार एक उत्तर पूर्वी भारतीय का था.आखिरकार डैनी को इस फ़िल्म में काम करने का मौका मिला मगर एक गायक के रूप में.

गाने पर हो गया था बवाल

डैनी ने इस फ़िल्म के गाने 'मेरा नाम आओ' को अपनी आवाज़ दी है.हालांकि, उनके इस गाने को लेकर बवाल भी हो गया था क्योंकि इस गाने में जिस तरह से उत्तर-पूर्वी भारतीयों, जिन्हें अपनी प्रादेशिक भाषा के चलते हिंदी बोलने में थोड़ी कठिनाई होती है, को दिखाया गया था उससे उनकी भावनाएं आहत हो गईं.उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी छवि को पर्दे पर बहुत ही ग़लत तरीके से पेश किया गया है.इसलिए इस गाने को फ़िल्म से हटा दिया गया.

लंबी है गानों की फे़हरिस्त

डैनी डेंज़ोगपा जिन्हें करियर के शुरुआती दौर में अपने पहाड़ी लुक और लहज़े के लिए कई डायरेक्टर्स ने कोई और करियर चुनने की सलाह दी थी, उन्होंने कड़ी मेहनत और लगन से इंडस्ट्री में अपनी एक अलग पहचान बनाई.डैनी ने खु़द को न सिर्फ़ एक आला दर्जे के एक्टर के रूप में बॉलीवुड में स्थापित किया बल्कि सिंगिग के क्षेत्र में भी अपना सफ़र जारी रखा.आपको जानकर हैरानी होगी कि उन्होंने बहुत सी फ़िल्मों के गाने गाए हैं.ख़ास बात ये है कि डैनी ने इंडस्ट्री के दिग्गज गायकों (किशोर कुमार, आशा भोंसले, मोहम्मद रफ़ी) के साथ गाने गाए, जिसकी लिस्ट कुछ इस प्रकार है-

'सुन सुन कसम से', काला सोना 1975

'मुझे दोस्तों तुम', गुमराह 1976

'हम से तुम मिले', लहू के दो रंग 1979

नेपाली भाषा में भी गाए गाने

इसके अलावा उन्होंने फे़मस म्यूजिक डायरेक्टर नदीम-श्रवण के साथ एक एलबम में भी काम किया था जिसका नाम 10 स्टार था.हालांकि, उनका सिंगिंग करियर कुछ ज़्यादा लाइम लाइट नहीं पा सका.मगर फिर भी डैनी गाते रहे.डैनी खु़द को एक ग़ज़ल सिंगर के तौर पर पेश करना चाहते थे क्योंकि उन्हें ग़ज़ल का बहुत शौक था.डैनी ने कुछ ग़ज़लें भी गाईं लेकिन वो ज़्यादा फे़मस नहीं हुईं.यही नहीं, उन्होंने कुछ नेपाली गानों में भी अपनी आवाज़ दी थी.ख़ास बात ये है कि इसमें उनका साथ फे़मस बॉलीवुड सिंगर आशा भोंसले ने दिया था.

Singer Danny Denzongpa
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डैनी का सिंगिंग करियर भले भी कुछ ख़ास नहीं रहा हो लेकिन उनकी एक्टिंग पर कोई भी सवाल नहीं उठा सकता.अच्छी बात ये है कि इतने साल बीत जाने के बाद भी वो एक से बढ़कर एक फ़िल्में देते जा रहे हैं.उम्मीद है कि डैनी ऐसे ही अपने काम से दर्शकों का मनोरंजन करते रहेंगे.