80 के दशक में सबसे पहले सुशील दोशी रेडियो पर हिंदी क्रिकेट कमेंट्री किया करते थे. 90 का दौर ख़त्म होने तक सुशील दोशी अपनी खनखनाती आवाज़ से श्रोताओं को मैच की हर एक गेंद का लेखा-जोखा सुनाया करते थे. फिर दौर आया टीवी कमेंट्री का, तो लोगों ने सुशील दोशी को भुला दिया. इस बीच रवि शास्त्री, सुनील गावस्कर, कपिल देव, मनिंदर सिंह, विवेक राज़दान और अरुण लाल ने हिंदी कमेंट्री का ज़िम्मा उठाया.

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अब समय है आकाश चोपड़ा का! आपने उन्हें हिंदी कमेंट्री करते हुए देखा और सुना है. आकाश चोपड़ा अपनी 'भारी-भरकम' शब्दों के लिए जाने जाते हैं. यही उनके क्रिटिसिज़्म का कारण भी है कि वो कमेंटरी को अपनी पर्सनालिटी से ओवर पावर कर देते हैं. जबकि उन्हें पसंद करने वालों को उनकी यही बात अच्छी लगती है.

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बिना देर करते हुए आपके सामने परोस रहे हैं 'आकाशवाणी' के वो One-Liners, जो उन्हें कमेंटरी का एंटरटेनमेंट किंग बनाते हैं:

Love Me Or Hate Me But You Can't Ignore Me आकाश चोपड़ा के लिए ये कहावत सही बैठती है.