सुमन कुमारी. शायद ही ये नाम आपने आज से पहले कभी सुना होगा लेकिन अब सुनेंगे. कोलकाता की झुग्गियों से निकलकर प्रोफ़ेशनल बॉक्सर बनी 22 साल की सुमन कुमारी अगले हफ़्ते चीन में खेली जा रही इंटरनेशनल चैंपियनशिप में हिस्सा लेने जा रही है.

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आज हम सुमन के बारे में इसलिए चर्चा कर रहे हैं क्योंकि विपरीत परिस्तिथियों के बावजूद उन्होंने कड़ी मेहनत के दम पर ये मुकाम हासिल किया है. कोलकाता के खिद्दिरपुर की झुग्‍गी बस्‍ती से निकलकर पहले नेशनल चैंपियन फिर यहां तक का सफ़र सुमन के लिए आसान नहीं रहा है.

कौन हैं बॉक्सर सुमन?

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सुमन कुमारी जब मात्र 12 साल की थीं तब से ही उन्होंने बॉक्सिंग शुरू कर दी थी. सुमन बॉक्सिंग में सब जूनियर, जूनियर और सीनियर चैंपियनशिप में स्‍टेट और नेशनल लेवल की कई चैंपियनशिप जीत चुकी हैं. साल 2016 में वो नेशनल चैंपियन बनी. इसके बाद सुमन ने शौकिया मुक्‍केबाज़ी को अलविदा कह दिया.

2017 में प्रोफ़ेशनल बॉक्सिंग में रखा कदम

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सुमन ने संन्यास के बाद प्रोफ़ेशनल बॉक्सिंग में कदम रखा. साल 2017 में दिल्‍ली में हुई 'सुपर बॉक्सिंग लीग' में उन्हें पहला ब्रेक मिला. अमजद खान बॉक्सिंग फ़ाउंडेशन चलाने वाले अमजद खान ने सुमन की काबिलियत की पहचान कर इस लीग में उन्हें मौक़ा दिया था.

पिता थे ट्रैम में कंडक्‍टर

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सुमन के पिता कोलकाता में चलने वाली ट्रैम (ट्रेन) में कंडक्‍टर की नौकरी किया करते थे. जबकि मां दूसरों के मां घरों में काम करती हैं. चार बहनों में सबसे छोटी सुमन अपने माता-पिता के साथ एक कमरे के मकान में रहती थीं. पिता सारी जमा पूंजी बड़ी बहनों की शादी में खर्च कर चुके थे. विपरीत परिस्तिथियों के बावजूद दृढ़ इच्‍छाशक्ति और बॉक्सिंग के प्रति लगाव के कारण ही सुमन ने बॉक्सिंग जारी रखी.

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सुमन के पिता मदन लाल मलिक का कहना था कि, जब 12 साल की उम्र में सुमन ने बॉक्सिंग शुरू की तो हम सब ये देख हैरान थे कि एक लड़की इस खेल में जाकर क्‍या करेगी? यहां तक कि हमने तो उसका हौसला तोड़ने की पूरी कोशिश भी की लेकिन जल्‍दी हमें समझ आ गया कि उसे सिर्फ़ मुक्‍केबाज़ी ही करनी है.

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सुमन के ट्रेनर बिष्‍नू बहादुर क्षेत्री कहते हैं कि देश की बॉक्सिंग फ़ेडरेशनों में काफ़ी राजनीति है. सुमन के साथ भी ऐसा ही हुआ. यहां आप केवल काबिलियत के दम पर ही फ़ेडरेशनों का ध्‍यान नहीं खींच सकते. लेकिन मैं अब खुश हूं कि वो प्रोफ़ेशनल बॉक्‍सर बन गई है.

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सुमन ने पिछले पिछले दो सालों में 54 किलो कैटेगरी में अपनी जगह बना ली है. इस बार दिल्‍ली के 'होप ऐंड ग्‍लोरी बॉक्सिंग' नाम के संगठन ने चीन में होने वाले इवेंट के लिए उसे अपने साथ लिया है.

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सुमन घर का खर्च चलाने के लिए इन दिनों नाकतला में बच्‍चों को बॉक्सिंग सिखाती हैं. वो घर-घर जाकर फ़िटनेस ट्रेनर का काम करती हैं. इसके अलावा वो कृषि विभाग में डी ग्रुप की संविदा पर काम करने वाली वर्कर भी हैं. इन सबके बीच सुमन प्रैक्टिस के लिए भी समय निकाल लेती हैं.

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सुमन कहती हैं, 'प्रोफ़ेशनल बॉक्सिंग से मुझे अभी बहुत अधिक पैसा तो नहीं मिल रहा लेकिन मुझे खुद पर भरोसा है कि एक दिन मेरे पास पैसा और शोहरत दोनों आएंगे, तब मैं अपने माता-पिता को एक अच्‍छी ज़िंदगी तोहफ़े के तौर पर दे पाऊंगी.'