भारत-चीन के बीच सीमा पर जारी तनाव के चलते 'आईपीएल' की टाइटल स्पॉन्सर चीनी कंपनी VIVO ने टूर्नामेंट से हाथ खींच लिए हैं. VIVO इस साल 'आईपीएल' की टाइटल स्पॉन्सरशिप से ब्रेक लेने जा रही है. इसके साथ ही बीसीसीआई जल्द ही 'आईपीएल' के नए स्पॉन्सर पर फ़ैसला ले सकती है. 

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बता दें कि चीनी स्मार्टफ़ोन कंपनी VIVO ने 2018 में 2199 करोड़ रुपये की मोटी रकम ख़र्च कर 5 साल के लिए 'आईपीएल' का कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया था. 'आईपीएल' के साथ उसका कॉन्ट्रैक्ट साल 2023 तक है. VIVO हर साल स्पॉन्सरशिप के तौर पर BCCI को 440 करोड़ रुपये देती है.

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NDTV की ख़बर के मुताबिक़, बीसीसीआई ने सोमवार को ये फ़ैसला लिया था. हालांकि, अब भी VIVO के कॉन्ट्रैक्ट के 3 साल बचे हुए हैं. ऐसे में कॉन्ट्रैक्ट ख़त्म करना VIVO, BCCI और फ्रैंचाइजी के लिए महंगा साबित हो सकता है. इसलिए चीनी कंपनी इस साल ब्रेक लेकर 2021, 2022 और 2023 में एक बार फिर से 'आईपीएल' के साथ जुड़ सकती है.

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हालांकि, रविवार को आईपीएल की गर्वनिंग काउंसिल ने 2020 के लिए सभी स्पॉन्सर्स को कायम रखने का फ़ैसला किया था. इसके बाद से बोर्ड के इस फ़ैसले का कड़ा विरोध हो रहा था. राजनीतिक पार्टियों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी बीसीसीआई को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा.

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जानकारी दे दें कि भारत-चीन विवाद के बाद भारत में चाइनीज़ प्रोडक्ट्स का कड़ा विरोध हो रहा है. VIVO चीनी फ़ोन निर्माता कंपनी है, इसलिए इसका भी विरोध किया जा रहा है. गलवान घाटी में भारतीय जवानों की शहादत और भावनाओं के कारण अब बीसीसीआई को ये फ़ैसला लेना पड़ा है.

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हाल ही में आईपीएल के साथ VIVO की स्पॉन्सरशिप बने रहने के BCCI के फ़ैसले को लेकर 'स्वदेशी जागरण मंच' ने हैरानी जताते हुए IPL का बहिष्कार करने की धमकी दी थी.