भारत में क्रिकेट जितना जुनून शायद ही किसी और खेल के लिए देखा जाता होगा. आज भारत क्रिकेट का सरताज है. लेकिन इस खेल को इस मुक़ाम तक पहुंचाने के लिए गावस्कर, कपिल, सचिन, कुंबले, हरभजन, धोनी और विराट कोहली जैसे खिलाड़ियों ने कड़ी मेहनत की है. ये खिलाडी आज के युवाओं के लिए रोल मॉडल हैं. लेकिन क्रिकेट का खेल बाहर से जितना ग्लैमरस लगता है उतना ही मुश्किल भी है. इस खेल के लिए खिलाड़ियों को हर वक़्त फ़िट रहना होता है. लम्बे समय तक क्रिकेट खेलने के लिए फ़िट रहना आज के दौर की ज़रूरत है. भारतीय क्रिकेट में भी कई ऐसे खिलाड़ी हुए हैं जिन्होंने एक बुरे दौर के बाद शानदार वापसी करते हुए अपने फ़ैंस को ख़ुश होने का मौक़ा दिया.

आईये देखते हैं वो कौन से भारतीय क्रिकेटर हैं, जिन्होंने चोट के बाद शानदार वापसी की थी.

1. नवाब पटौदी

नवाब पटौदी भारत का एक ऐसा कप्तान जिसने टीम इंडिया को पहली बार विदेशी धरती पर जीतना सिखाया. मात्र 20 साल की उम्र में काउंटी क्रिकेट खेलने के दौरान एक कार हादसे में नवाब पटौदी की दाहिनी आंख की रौशनी चली गई थी. इसके बाद उनका क्रिकेट करियर हमेशा के लिए ख़त्म लग रहा था, लेकिन हादसे के कुछ महीने बाद ही उन्होंने नेट प्रक्टिस शुरू कर दी. 6 महीने से भी कम समय में पटौदी ने दिल्ली में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ अपने टेस्ट करियर की शुरुआत की. चेन्नई में उनके तीसरे ही टेस्ट मैच में 103 रन की साहसिक पारी की बदौलत भारत इंग्लैंड के ख़िलाफ़ अपनी पहली सीरीज़ जीतने में सफ़ल रहा. ये उनके शानदार खेल का ही परिणाम था कि मात्र 21 साल की उम्र में वो भारतीय टीम के कप्तान बन गए थे.

2. सचिन तेंदुलकर

साल 2004 में क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर भी टेनिस एल्बो के चलते 1 साल से ज़्यादा समय के लिए क्रिकेट से दूर रहे थे. क्रिकेट खेलना तो दूर की बात सचिन को बैट पकड़ने में भी तकलीफ़ हो रही थी. ये उनके करियर का सबसे ख़राब दौर था. उस वक़्त कई डॉक्टर्स और एक्सपर्ट भी कह चुके थे कि अब शायद ही सचिन कभी क्रिकेट खेल पाएं. लेकिन क्रिकेट के प्रति ये सचिन का पैशन ही था, जो उन्हें एक बार फिर मैदान पर खींच लाया. साल 2005 में श्रीलंका के ख़िलाफ़ शानदार वापसी करते हुए सचिन ने टेस्ट क्रिकेट में अपना 35वां शतक पूरा किया. इसके बाद सचिन ने टेस्ट में अपने 51 शतक पूरे किये.

3. ज़हीर ख़ान

टीम इंडिया के तेज़ गेंदबाज़ ज़हीर ख़ान को भी साल 2004-2005 सीज़न के दौरान चोट लगने के कारण टीम से बाहर होना पड़ा था. लेकिन इंजरी से जूझने के बाद ज़हीर ने टीम इंडिया में वापसी करने के बजाय काउंटी क्रिकेट खेलना बेहतर समझा. काउंटी में अच्छे प्रदर्शन के बाद ज़हीर ने साल 2006-2007 में टीम इंडिया में ज़बरदस्त वापसी करते हुए 28 मैचों में शानदार 49 विकेट्स झटके. इसके बाद ज़हीर लगातार 6 साल तक टीम इंडिया में मुख्य गेंदबाज़ के तौर पर टीम को कई अहम मौक़ों पर जीत दिलाते रहे.

4. मोहिंदर अमरनाथ

1983 वर्ल्डकप के हीरो मोहिंदर अमरनाथ को भारतीय क्रिकेट का कमबैक किंग भी कहा जाता है. साल 1978-1979 में ख़राब फ़ॉर्म और फ़िटनेस के चलते उनको टीम से बाहर कर दिया गया था. लेकिन साल 1982-1983 में विदेशी सरज़मी पर खेले गए 11 टेस्ट मैचों में 5 शतक लगाकर शानदार तरीके से टीम में वापसी की. उसके बाद जिमी 1983 वर्ल्डकप के सेमीफ़ाइनल और फ़ाइनल में मैन ऑफ़ द मैच भी बने.

5. युवराज सिंह

सिक्सर किंग युवराज सिंह का क्रिकेट करियर हमेशा से ही उतार-चढ़ाव वाला रहा है. कभी चोट तो कभी ख़राब फ़ॉर्म और बीमारी के चलते उन्हें टीम से बाहर होना पड़ा था. लेकिन युवराज ने हर बार शानदार तरीके से वापसी की. वर्ल्डकप 2011 के दौरान कैंसर जैसी भयानक बीमारी से पीड़ित होने के बावजूद युवी ने टीम इंडिया की जीत में अहम भूमिका निभाई. युवराज सिंह वर्ल्डकप 2011 के मैन ऑफ़ द सीरीज़ भी थे.

6. अनिल कुंबले

वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ एक टेस्ट मैच के दौरान अनिल कुंबले को जबड़े पर चोट आयी थी. बावजूद इसके उन्होंने पवेलियन में बैठने के बजाय मैदान पर टीम के लिए खेलना बेहतर समझा. उस मैच में कुंबले ने सिर पर पट्टी बांधकर गेंदबाज़ी की थी.

7. मोहम्मद शमी

2015-वर्ल्डकप के दौरान शानदार प्रदर्शन के बाद शमी को घुटने में चोट के चलते तकरीबन डेढ़ साल के लिए क्रिकेट से दूर रहना पड़ा था. लेकिन साल 2016 में उन्होंने शानदार वापसी करते हुए 10 टेस्ट में 29 विकेट्स झटके. शमी इस समय टीम इंडिया के प्रमुख टेस्ट गेंदबाज़ हैं.

8. रोहित शर्मा

टीम इंडिया के ओपनर बल्लेबाज़ रोहित शर्मा भी अक्टूबर 2016 से अप्रैल 2017 तक Hamstring Injury के चलते टीम से बाहर रहे थे. लेकिन इंजरी से उभरने के बाद रोहित ने 10 वनडे मैचों में 3 शतक लगाकर शानदार वापसी की.

9. आशीष नेहरा

टीम इंडिया में आशीष नेहरा के लिए एक कहावत है कि ‘नेहरा में सर्जरी हैं या सर्जरी में नेहरा’. नेहरा ने अपने 18 साल के क्रिकेट करियर में चोट के कारण सिर्फ़ 17 टेस्ट, 120 वनडे और 27 टी-20 मुक़ाबले ही खेले. साल 1999 से 2005 तक उनका करियर बेहतरीन रहा. लेकिन 2005 में घुटने की चोट के चलते नेहरा लगभग 2 साल के लिए टीम से बाहर रहे. चोट से उभरने के बाद साल 2008 में पहले आईपीएल में उन्होंने शानदार गेंदबाज़ी की और आईपीएल के टॉप-10 गेंदबाज़ों में से एक रहे. साल 2009 से 2011 तक नेहरा टीम इंडिया के प्रमुख़ गेंदबाज़ रहे. ये उनके करियर का सुनहरा दौर था.

10. केदार जाधव

केदार जाधव ने आईपीएल-11 में चेन्नई सुपरकिंग्स और मुंंबई इंडियंस के बीच खेले गए उद्घाटन मैच को यादगार बना दिया था. जाधव जब बल्लेबाज़ी करने आये, तो कुछ समय बाद ही इंजर्ड होकर पवेलियन लौट गए. लेकिन जब टीम हार की कगार पर थी, तो वो फिर से बल्लेबाज़ी करने आये और 22 गेंद पर 24 रन बनाकर टीम को शानदार जीत दिलाई.

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