वर्ल्ड कप के बाद से ये खिलाड़ी टीम में नहीं है, अपनी मर्ज़ी से नहीं है या बाहर बिठा दिया गया है, यह स्पष्ट नहीं है. फिर भी लोग हर मैच में उसे देखना चाहते हैं, आप भी समझ गए होंगे कि हम महेंद्र सिंह धोनी की बात कर रही हैं. अभी इसिलए बात कर रहे हैं क्योंकि आज ही के दिन भारत के सबसे सफ़ल कप्तानों में शुमार महेंद्र सिंह धोनी ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था.

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महेंद्र सिंह धोनी की जैसी शुरुआत हुई थी, कोई कह नहीं सकता था कि वो दूसरा मैच भी खेल पाएंगे. 2004 में बांग्लादेश के ख़िलाफ पहले मैच में ही ज़ीरो पर रन आउट. पूरी सीरीज़ में धोनी का प्रदर्शन औसत ही रहा था.

चूंकि भारतीय टीम अच्छे विकेट-कीपर की समस्या से जूझ रही थी, धोनी को दूसरा मौक़ा पाकिस्तान के खिलाफ़ मिला और सीरीज़ के दूसरे मैच में धोनी ने ऐसा धमाका किया कि उसकी याद आज तक लोगों के ज़हन में ताज़ा है, 123 गेंदों में 148 रनों की पारी.

धोनी युग की शुरुआत

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तब टी20 फ़ॉर्मेट ताज़ा-ताज़ा था, युवा महेंद्र सिंह धोनी को कप्तानी सौंपी गई. भारतीय टीम को क्रिकेट एक इस नए फ़ॉर्मेंट में कोई ख़ास अनुभव नहीं था, बावजूद इसके भारतीय टीम एक एतिहासिक मैच में वर्ल्ड कप विजेता बनी.

इसके बाद तो जीत का सिलिसिला ही चल पड़ा. एक-एक करके भारतीय टीम ने नई ऊंचाइया देखी. धोनी की कप्तानी में भारतीय टीम ने दो बार एशिया कप जीता, वर्ल्ड चैंपियन बने, चैंपियन्स ट्रॉफ़ी जीती, टेस्ट की वर्ल्ड नंबर वन टीम बनी, ख़ुद धोनी वनडे के नंबर वन रैंकिंग तक गए, ऐसा करने वाले वो सचिन के बाद दूसरे भारतीय बल्लेबाज़ बने. साल 2008 में ICC ने महेंद्र सिंह धोनी को प्लेयर ऑफ़ दी इयर का पुरस्कार दिया था.

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धोनी इकलौते ऐसे कप्तान हैं, जिसने ICC की तीनों ट्रॉफ़ियों को जाता है, पहले T20 वर्ल्ड कप(2007), वर्ल्ड कप(2011) और चैंपियंस ट्रॉफ़ी(2013).

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महेंद्र सिंह धोनी की बैटिंग तकनीक की वजह से उनके टेस्ट मैचों के लिए उपयुक्त नहीं माना गया था. लेकिन उनकी कप्तानी के दौरान भारत ने सबसे ज़्याद जीतें दर्ज कीं औऱ उन्होंने सौरव गांगुली को पछाड़ दिया. छठे नंबर पर बल्लेबाज़ी करते हुए कप्तान का निजी प्रदर्शन भी औसत से अच्छा ही रहा है, 90 मैचों में उन्होंने 38.09 की औसत से 4876 रन बनाए हैं.

आईपीएल

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महेंद्र सिंह धोनी पहले सीज़न के सबसे महंगे खिलाड़ी थे. उनकी नेतृत्व में चेन्नई की टीम IPL की 3 ट्रॉफ़ी जीत चुकी है, महेंद्र सिंह धोनी की चेन्नई सुपर किंग इस टूर्नामेंट की सबसे भरोसेमंद टीम में से एक है.

महेंद्र सिंह धोनी ने दो बार पुणे की टीम का भी नेतृत्व किया है, पहली बार ये टीम 7वें स्थान पर ही थी और दूसरी बार में फ़ाइनल तक का सफ़र तय किया था.

सबसे सफ़ल विकेट-कीपर

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भारतीय टीम ने धोनी से अच्छा विकेट कीपर नहीं देखा. उम्र के इस पड़ाव पर भी उनकी फुर्ती देखते बनती हैं. वो विश्व के तीसरे सबसे सफ़ल विकेट कीपर हैं, उनके नाम सबसे ज़्यादा 123 स्टंप करने का रिकॉर्ड है, किसी अन्य कीपर ने 100 भी नहीं किए.