भोपाल की युवा शूटर चिंकी यादव ने हाल ही में 'नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप' के दौरान 25 मीटर पिस्टल इवेंट में गोल्ड मेडल जीता है.

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इस मुकाम तक पहुंचने के लिए चिंकी को कई तरह की कठिनाईयों का सामना करना पड़ा. बिना किसी वित्तीय मदद के इंटरनेशल लेवल पर जाकर गोल्ड मेडल जीतना आसान नहीं था लेकिन चिंकी ने ये कर दिखाया. बेटी की इस उपलब्धि से पिता मेहताब सिंह यादव भी बेहद खुश हैं.

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चिंकी यादव के पिता मेहताब सिंह खेल विभाग में इलेक्ट्रिशियन के पद पर कार्यरत हैं. इसलिए वो अपने परिवार के साथ स्टेडियम में ही रहते हैं. चिंकी बचपन से ही स्टेडियम में खिलाड़ियों को शूटिंग की प्रैक्टिस करते देखा करती थी.

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यहीं से ही शूटिंग के प्रति उनका लगाव बढ़ता गया. इसके बाद चिंकी यादव ने 'मध्य प्रदेश अकेडमी' में प्रवेश लिया. तात्या टोपे स्टेडियम में रहकर उन्होंने अपने खेल काे निखारा. चिंकी यादव के छोटे भाई भी शूटर हैं. वो भी चिंकी की तरह ही 'मध्य प्रदेश शूटिंग अकेडमी' के नियमित खिलाड़ी हैं.

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चिंकी यादव ने साल 2017 में 'जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप' के दौरान ब्रोन्ज़ मेडल अपने नाम किया था.

Indiatimes की रिपोर्ट के मुताबिक़, चिंकी के पिता मेहताब सिंह यादव का कहना है कि शूटिंग काफ़ी महंगा खेल है. मेरे पास इस खेल के इक्विपमेंट ख़रीदने के पैसे भी नहीं थे लेकिन खेल विभाग ने इसके लिए मेरे परिवार की पूरी मदद की.

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खेलमंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने भी चिंकी की इस उपलब्धि पर ख़ुशी ज़ाहिर की है.

सफ़लता उन्हीं को मिलती है जो जीतने के लिए आख़िरी समय तक लड़ते हैं. चिंकी यादव भी उन्हीं खिलाड़ियों में से एक हैं.